केंद्र सरकार ने दिल्ली हाई कोर्ट(Delhi High Court) को कहा है कि एयर प्यूरीफायर (Air Purifiers)पर GST की दर, वर्गीकरण और कटौती के मामलों का निर्णय पूरी तरह से जीएसटी परिषद के अधिकार क्षेत्र में आता है। सरकार ने चेतावनी दी है कि इस संबंध में किसी भी न्यायिक निर्देश को लागू करना न केवल संवैधानिक रूप से अस्वीकार्य होगा, बल्कि सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) के ढांचे का उल्लंघन भी माना जाएगा। केंद्र की दलील का मुख्य उद्देश्य यह बताना है कि जीएसटी नीति और दरें केवल जीएसटी परिषद द्वारा निर्धारित की जा सकती हैं, और न्यायालय को इस मामले में हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है।
दिल्ली हाई कोर्ट में दायर जनहित याचिका में एयर प्यूरीफायर पर जीएसटी कम करने और उन्हें मेडिकल डिवाइस घोषित करने की मांग की गई थी। इसके जवाब में केंद्र सरकार ने हलफनामा दायर किया। केंद्र ने कहा कि जीएसटी परिषद संविधान के अनुच्छेद 279A के तहत गठित एक संवैधानिक निकाय है। यह परिषद जीएसटी दरों, छूटों और वर्गीकरणों पर सिफारिशें करने के लिए एकमात्र संवैधानिक रूप से नामित प्राधिकरण है। सरकार ने न्यायालय को बताया कि ऐसे मामलों में कोर्ट का कोई हस्तक्षेप संवैधानिक रूप से उचित नहीं होगा, क्योंकि यह सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) के ढांचे का उल्लंघन कर सकता है।
सिफारिशें करने की गुंजाइश नहीं
केंद्र ने कहा कि जीएसटी परिषद एक संविधानिक निकाय (Constitutional Body) है, जिसे अनुच्छेद 279A के तहत विशेष रूप से गठित किया गया है। सरकार ने स्पष्ट किया कि परिषद को सौंपे गए मामलों में किसी अन्य संस्था या प्राधिकरण द्वारा सिफारिश करने की कोई गुंजाइश नहीं है। केंद्र ने आगे कहा कि कोर्ट द्वारा जीएसटी दरों का निर्धारण संवैधानिक तंत्र को दरकिनार करने के बराबर होगा। हलफनामे में यह भी कहा गया कि यह सर्वमान्य कानून है कि न्यायालय संविधानिक रूप से नामित निर्णयकर्ताओं का स्थान नहीं ले सकते, विशेषकर आर्थिक नीति और राजकोषीय संरचना से जुड़े मामलों में।
न्यायिक हस्तक्षेप संघीय संतुलन को बिगाड़ देगा
केंद्र ने कहा कि जीएसटी संबंधी निर्णय, विशेषकर दरें, सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) की जटिल प्रक्रिया का परिणाम हैं। यह प्रक्रिया संघ और राज्यों के विभिन्न राजकोषीय हितों को संतुलित करती है। सरकार ने चेतावनी दी कि ऐसे मामलों में न्यायिक हस्तक्षेप इस संवैधानिक रूप से अनिवार्य प्रक्रिया को दरकिनार कर देगा और संघीय संतुलन को बिगाड़ देगा।
केंद्र ने स्पष्ट किया कि यदि दिल्ली हाई कोर्ट जीएसटी दरों में संशोधन करने, परिषद की बैठक बुलाने या किसी विशेष निर्णय पर परिषद को बाध्य करने का निर्देश जारी करता है, तो यह अदालत द्वारा जीएसटी परिषद के कार्यभार को संभालने जैसा होगा, और शक्तियों के पृथक्करण (Separation of Powers) के सिद्धांत का उल्लंघन माना जाएगा।
एयर प्यूरीफायर पर उच्चतम कर स्लैब लागू नहीं
केंद्र ने बताया कि एयर प्यूरीफायर को टैरिफ हेडिंग 8421 के अंतर्गत वर्गीकृत किया गया है, जिस पर 18 प्रतिशत जीएसटी लागू होती है। जबकि मेडिकल डिवाइस हेडिंग 9018 से 9022 के अंतर्गत आते हैं, जिन पर 5 प्रतिशत की मेरिट दर लागू होती है। हलफनामे में स्पष्ट किया गया है कि एयर प्यूरीफायर पर उच्चतम कर स्लैब (40%) लागू नहीं होता, बल्कि केवल 18 प्रतिशत जीएसटी लगता है। केंद्र ने कहा कि जीएसटी परिषद संविधान के अनुच्छेद 279A के तहत गठित संवैधानिक निकाय है, और केवल वही दरें, वर्गीकरण और छूट निर्धारित करने का अधिकार रखती है। किसी भी न्यायालय का हस्तक्षेप संवैधानिक तंत्र और संघीय संतुलन को प्रभावित कर सकता है।
केंद्र ने कहा कि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन संबंधी संसदीय स्थायी समिति की सिफारिशों के बाद एयर प्यूरीफायर पर जीएसटी का मामला संसदीय प्रक्रिया के माध्यम से विचाराधीन है। हलफनामे में स्पष्ट किया गया है कि इस स्तर पर वर्तमान याचिका पर न्यायालय द्वारा निर्णय करना, पहले से संसदीय प्रक्रिया में विचाराधीन मुद्दों पर समानांतर विचार करने के बराबर होगा। दिल्ली हाई कोर्ट में इस मामले की सुनवाई कल होने वाली है।
केंद्र से जवाबी हलफनामा मांगा था
दिल्ली हाई कोर्ट में एयर प्यूरीफायर पर जीएसटी कम करने और उन्हें मेडिकल डिवाइस घोषित करने की जनहित याचिका की पिछली सुनवाई 26 दिसंबर को हुई थी। उस दिन जस्टिस विकास महाजन और जस्टिस विनोद कुमार की अवकाशकालीन पीठ ने केंद्र सरकार को अपना जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए 10 दिन का समय दिया। अधिकारियों के अनुसार, यह समय केंद्र की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) एन. वेंकटरमन द्वारा विस्तृत जवाब दाखिल करने के लिए मांगा गया था।
हाई कोर्ट ने 5 % की दर सुझाया था
दिल्ली हाई कोर्ट की पूर्व सुनवाई में, मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तुषार राव गेडेला की पीठ ने जीएसटी परिषद को निर्देश दिया था कि वे जल्द से जल्द बैठक बुलाकर एयर प्यूरीफायर पर 18 प्रतिशत जीएसटी को कम करने पर विचार करें। पीठ ने कहा था कि दिल्ली-एनसीआर में बिगड़ती वायु गुणवत्ता को देखते हुए 5 प्रतिशत की दर लागू करना उचित हो सकता है।
मुख्य न्यायाधीश उपाध्याय की अध्यक्षता वाली बेंच ने दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण संकट को लेकर केंद्र सरकार को फटकार लगाई और कहा कि यदि नागरिकों को स्वच्छ हवा उपलब्ध नहीं कराई जा सकती, तो कम से कम एयर प्यूरीफायर पर जीएसटी कम किया जाना चाहिए।
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