अभिषेक सिंह सेमर, तखतपुर। छत्तीसगढ़ के पहले और देश के 95वें रामसर साइट के रूप में घोषित कोपरा जलाशय में शुक्रवार को भव्य बर्ड वॉचिंग और संगोष्ठी कार्यक्रम का आयोजन किया गया. 9 जनवरी 2026 को आयोजित यह पहला बर्ड वॉक कार्यक्रम प्रकृति प्रेमियों और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े विशेषज्ञों के लिए खास आकर्षण का केंद्र रहा. उल्लेखनीय है कि भारत सरकार ने 12 दिसंबर 2025 को कोपरा जलाशय को रामसर साइट घोषित किया था.


सुबह 7 बजे से 9 बजे तक आयोजित बर्ड वॉक में छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों से आए 97 प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया. कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य वन संरक्षक बिलासपुर मनोज कुमार पाण्डेय ने किया. उन्होंने प्रतिभागियों से परिचय प्राप्त कर रामसर साइट घोषित होने पर सभी को शुभकामनाएं दीं. इस दौरान कोपरा जलाशय से जुड़े ग्रामीणों को भी पक्षियों की प्रजातियों और उनके संरक्षण के महत्व के बारे में जानकारी दी गई.

कार्यक्रम में देश-प्रदेश के जाने-माने विशेषज्ञों की मौजूदगी ने आयोजन को विशेष गरिमा प्रदान की. दिल्ली से आए ‘पॉन्ड मैन ऑफ इंडिया’ रामवीर तंवर, ‘वॉटर मैन ऑफ छत्तीसगढ़’ वीरेंद्र सिंह और वरिष्ठ वैज्ञानिक नीतू हरमुख सहित कई वरिष्ठ प्रकृति प्रेमी और पक्षी विशेषज्ञ शामिल हुए.

बर्ड वॉचिंग के दौरान प्रतिभागियों ने 82 प्रजातियों के स्थानीय, दुर्लभ और प्रवासी पक्षियों का अवलोकन किया. इनमें रेड क्रेस्टेड पोचार्ड, यूरेशियन कूट, गडवाल और ओपन बिल स्टॉर्क प्रमुख रहे. यह अनुभव सभी प्रकृति प्रेमियों के लिए यादगार रहा.
कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री एवं बिलासपुर सांसद तोखन साहू, तखतपुर विधायक धर्मजीत सिंह, बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला, जिला पंचायत अध्यक्ष राजेश सूर्यवंशी, महापौर बिलासपुर पूजा विधानी सहित अनेक जनप्रतिनिधियों की गरिमामयी उपस्थिति रही.
केंद्रीय मंत्री तोखन साहू ने अपने संबोधन में कहा कि कोपरा जलाशय का छत्तीसगढ़ का पहला रामसर साइट बनना पूरे प्रदेश के लिए गर्व की बात है. यह राज्य की प्राकृतिक संपदा और जैव विविधता की समृद्धि को दर्शाता है. इस अवसर पर उन्होंने कोपरा जलाशय के आधिकारिक लोगो का विमोचन भी किया. लोगो में प्रवासी पक्षी बार-हेडेड गूज को दर्शाया गया है, जबकि ‘हमर कोपरा, हमर गौरव’ संदेश स्थानीय सहभागिता और संरक्षण भावना को प्रतिबिंबित करता है.
संगोष्ठी के दौरान रामवीर तंवर ने जलाशयों के संरक्षण और सामुदायिक सहभागिता के महत्व पर प्रकाश डाला. वहीं वीरेंद्र सिंह ने कहा कि जलाशयों की स्वच्छता केवल प्रशासन की नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी है.
कार्यक्रम के बाद केंद्रीय मंत्री, जनप्रतिनिधियों और वरिष्ठ वन अधिकारियों ने स्मृति वन के विकास को लेकर चर्चा की. भविष्य में स्मृति वाटिका को और विकसित कर पर्यावरणीय दृष्टि से आदर्श स्थल बनाने की योजना पर सहमति बनी.
कार्यक्रम को सफल बनाने में वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और कर्मचारियों की अहम भूमिका रही. वन मंडलाधिकारी नीरज द्वारा आभार प्रदर्शन किया गया.
गौरतलब है कि रामसर साइट अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमि होती है, जिसे 1971 के रामसर कन्वेंशन के तहत संरक्षण प्रदान किया जाता है. भारत इस संधि में वर्ष 1981 में शामिल हुआ था और देश की पहली रामसर साइट चिल्का झील है.
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