कुमार इंदर, जबलपुर। Jabalpur Cow Dung Urine Scam: मध्य प्रदेश में अब तक आपने सीमेंट, ड्राय फ्रूट, टेंट, फर्जी शिक्षक और पेंट घोटाला सुना होगा। लेकिन जबलपुर में जो स्कैम हुआ है, वह अब तक के सारे घोटालों को भी पीछे छोड़ देगा। दरअसल, यहां गौमूत्र और गोबर के नाम पर साढ़े 3 करोड़ का भ्रष्टाचार उजागर हुआ है। 

गोबर, गौमूत्र से कैंसर और टीबी पर रिसर्च के नाम पर लिए साढ़े 3 करोड़

दरअसल साल 2011 में पंचगव्य योजना के तहत विश्वविद्यालय ने गाय के गोबर, गौमूत्र और दूध से कैंसर और टीबी जैसी बीमारियों पर रिसर्च के नाम पर सरकार से 8 करोड़ की मांग की। लेकिन केवल 3 करोड़ 50 लाख स्वीकृत कर दिए। 10 साल के रिसर्च के बाद भी गाय के गोबर, गौमूत्र और दूध से कैंसर जैसी बीमारियों का इलाज खोजने में यूनिवर्सिटी नाकाम साबित हुई। 

सरकारी फंड से किया सैर सपाटा

सरकारी फंड से वेटरनरी विश्वविद्यालय की टीम ने सैर सपाटा कर लिया। रिसर्च के लिए मिले साढ़े तीन करोड़ रुपए से जमकर मौज की गई। अफसरों ने गोवा, मुंबई, बैंगलोर, कोलकाता, हैदराबाद, कोच्चि समेत देश के 20 बड़े शहरों में खूब लुत्फ उठाया। इसके अलावा, इंदौर, भोपाल, ग्वालियर जाने के लिए AC ट्रेन का आनंद लिया। 

कार खरीदी, किसानों का कागजों में दिया प्रशिक्षण

साढ़े सात लाख रुपए कार खरीद ली और उससे घूमने-फिरने के लिए डीजल और गाड़ी की मरम्मत में 8 लाख रुपए खर्च कर दिए। जबलपुर के अलावा भिंड, मुरैना सहित कई जिलों के किसानों को कागजों में ही प्रशिक्षण दे दिया गया।

कई अधिकारी और कर्मचारी दोषी

हाल ही में इससे जुड़ी एक शिकायत कलेक्टर को मिली, जिसकी जांच के बाद करोड़ों रुपए का घोटाला सामने आया।विश्वविद्यालय के दिए गए दस्तावेजों की जांच में पूरा सच सामने आ गया। अब तक की जांच में कई अधिकारी और कर्मचारी दोषी पाए गए हैं।

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