Bastar News Update : सुकमा. जिले के गादीरास स्थित आवासीय पोटाकेबिन में पढ़ने वाले 11वीं कक्षा के छात्र के आत्महत्या का मामला सामने आया है. छात्र की पहचान मड़कम विकास के रूप में हुई है. बताया जा रहा है कि छात्र प्रेम प्रसंग में मानसिक तनाव से जूझ रहा था. छात्र का शव पोटाकेबिन से दो किलोमीटर दूर जंगल में मिला. सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि छात्र के देर शाम से गायब होने के बावजूद प्रबंधन ने कोई खोजबीन नहीं की. न पुलिस को सूचना दी गई, न अधिकारियों को. घटनास्थल से सिगरेट, कोल्ड ड्रिंक की बोतलें और जमीन पर बनाए गए अक्षर कई सवाल खड़े कर रहे हैं. पुलिस इसे प्रेम प्रसंग से जोड़कर देख रही है, लेकिन लापरवाही की भूमिका भी जांच के दायरे में है. परिजन बेटे की मौत से सदमे में हैं और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं. यह घटना आवासीय पोटाकेबिनों की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल है.

दंतेवाड़ा – गोदाम में सड़ा अनाज, गांवों में भूख की चिंता
गीदम वेयरहाउस में 30 हजार क्विंटल चावल खराब होने का असर सीधे आदिवासी इलाकों पर पड़ा है. भैरमगढ़ और गीदम विकासखंड में तय समय पर चावल उत्सव नहीं हो सका. करीब 70 उचित मूल्य दुकानों में सवा लाख से अधिक हितग्राही खाली हाथ लौटे. समय पर चावल नहीं पहुंचने से ग्रामीणों में नाराजगी देखी गई. प्रशासनिक जांच में भंडारण और गुणवत्ता जांच में भारी लापरवाही सामने आई है. क्वालिटी इंस्पेक्टर द्वारा बिना जांच ओके रिपोर्ट देने का आरोप है. जांच रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है और कार्रवाई के संकेत मिले हैं. प्रशासन वैकल्पिक व्यवस्था का भरोसा दे रहा है, लेकिन भरोसा डगमगाया हुआ है.
नारायणपुर – राष्ट्रीय मंच पर नारायणपुर के खिलाड़ियों की बड़ी जीत
जम्मू-कश्मीर में आयोजित 20वीं राष्ट्रीय मत्सोगी-डो चैंपियनशिप में नारायणपुर के खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया. जिले के 14 खिलाड़ियों ने विभिन्न वर्गों में पदक जीतकर छत्तीसगढ़ को गौरवान्वित किया. सीनियर महिला वर्ग में अंजलि कांगे ने स्वर्ण पदक अपने नाम किया. सब-जूनियर वर्ग में श्वेता भौमिक और अनुप्रिया बरा को रजत मिला. टीम स्पर्धा में छत्तीसगढ़ ने पहला स्थान हासिल किया. इस सफलता में रेफरी और प्रशिक्षकों की भी अहम भूमिका रही. खिलाड़ियों को जिलेभर से बधाइयाँ मिल रही हैं. यह उपलब्धि युवाओं के लिए प्रेरणा बनकर उभरी है.
नारायणपुर – नशे में बिगड़े रिश्ते, पिता-पुत्र विवाद हिंसा में बदला
छोटेडोंगर क्षेत्र में पारिवारिक विवाद ने खौफनाक रूप ले लिया. शराब के नशे में पुत्र ने अपने ही पिता पर हमला कर दिया. हमले में पिता का निचला होंठ पूरी तरह कट गया. घटना के बाद घायल को पहले प्राथमिक इलाज, फिर जिला अस्पताल भेजा गया. डॉक्टरों के अनुसार स्थिति गंभीर बनी हुई है. पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. घटना में शराब की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है. यह घटना नशे के सामाजिक दुष्परिणामों को उजागर करती है.
कोंडागांव – हाईवे चौड़ा करने उतरा प्रशासन, अतिक्रमण पर कार्रवाई
राष्ट्रीय राजमार्ग-30 को सुरक्षित बनाने के लिए केशकाल में अतिक्रमण हटाओ अभियान शुरू हुआ. करीब 182 अतिक्रमणकारियों को पहले ही नोटिस दिया जा चुका था. नोटिस अवधि खत्म होने के बाद अब कार्रवाई की जा रही है. मौके पर राजस्व, नगर पंचायत और पुलिस बल तैनात है. प्रशासन का कहना है कि चौड़ीकरण से जाम और हादसे कम होंगे. यातायात व्यवस्था को सुचारू करने की दिशा में यह कदम अहम है. नागरिकों से स्वेच्छा से सहयोग की अपील की गई है. विरोध के बीच विकास कार्य को आगे बढ़ाया जा रहा है.
बस्तर – नशे के सौदागर पर शिकंजा, ट्रामाडोल के साथ गिरफ्तारी
बस्तर पुलिस ने नशे के खिलाफ अभियान में बड़ी सफलता हासिल की है. बोधघाट थाना क्षेत्र से ट्रामाडोल कैप्सूल के साथ एक युवक गिरफ्तार हुआ. आरोपी मोटरसाइकिल से नशीली दवा की सप्लाई कर रहा था. 15 पत्तों में कुल 120 कैप्सूल बरामद किए गए. जब्त दवाओं की कीमत लाखों में बताई जा रही है. आरोपी के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत कार्रवाई की गई. पुलिस की सतर्कता से बड़ी खेप बाजार में पहुंचने से रुकी. नशे के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा.
बस्तर – गांजा तस्करी पर वार, अंतरराज्यीय आरोपी गिरफ्तार
नगरनार पुलिस ने 10.700 किलो गांजा के साथ एक युवक को पकड़ा है. आरोपी उत्तर प्रदेश का निवासी बताया जा रहा है. एनएच-63 पर घेराबंदी कर कार्रवाई की गई. बरामद गांजे की कीमत करीब साढ़े पांच लाख रुपये है. आरोपी बोरी लेकर वाहन का इंतजार कर रहा था. एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है.पुलिस तस्करी के नेटवर्क की जांच में जुटी है. अंतरराज्यीय सप्लाई चैन पर नजर रखी जा रही है.
बस्तर – ट्रामा सेंटर कागजों में, मरीज रास्ते में दम तोड़ रहे
बस्तर संभाग का सबसे बड़ा अस्पताल आज भी ट्रामा सेंटर से वंचित है. दुर्घटनाओं के बढ़ते मामलों के बीच यह बड़ी विडंबना है. मेकॉज में वर्षों पहले मेडिकल कॉलेज की स्थापना हो चुकी है. सरकार ने ट्रामा सेंटर के लिए बजट भी स्वीकृत किया. फिर भी गंभीर मरीजों को 300 किलोमीटर दूर रेफर किया जा रहा है. गोल्डन आवर में इलाज न मिलना जानलेवा बन रहा है. सुविधाएं तैयार होने के दावे फाइलों में सिमटे हैं. सवाल है—कब हकीकत बनेगा ट्रामा सेंटर?
सुकमा – आत्मसमर्पण के साथ उजागर हुआ नक्सली हथियारों का सच
नक्सलियों के बड़े कमांडर बारसे देवा के आत्मसमर्पण से कई राज खुले हैं. उसके पास मौजूद टवोर रायफल विदेशी नहीं, लूटी हुई निकली. यह हथियार 2014 में कोबरा जवानों से छीना गया था. नक्सली इसे सिर्फ दिखावे के लिए इस्तेमाल कर रहे थे. कारतूस की कमी से हथियार बेकार पड़ा था. अब भी नक्सलियों के डंप में सैकड़ों हथियार होने की आशंका है. सरेंडर से नेटवर्क कमजोर जरूर हुआ है. लेकिन चुनौती अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई.
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