प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार (10 जनवरी, 2026) को गुजरात के सोमनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना की. इस दौरान उन्होंने प्राचीन तीर्थस्थल पर ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ समारोह के तहत आयोजित अनुष्ठानों में भाग भी लिया. पीएम मोदी ने इस मौके पर भव्य ड्रोन शो भी देखा, जिसमें कई विषयों पर आधारित आकृतियों के जरिए भगवान शिव और शिवलिंग की विशाल छवियां बनाई गईं. इसके साथ ही सोमनाथ मंदिर का एक शानदार 3डी डिपिक्शन भी किया गया.
सामूहिक ओंकार मंत्र जाप में पीएम मोदी ने लिया भाग
पीएम मोदी ने सोमनाथ मंदिर में आयोजित ओंकार मंत्र के सामूहिक जाप में हिस्सा लिया. ऐतिहासिक सोमनाथ मंदिर पर हुए पहले हमले के 1,000 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में सोमनाथ स्वाभिमान पर्व मनाया जा रहा है, जिसकी शुरुआत 8 जनवरी को हुई थी और यह रविवार (11 जनवरी, 2025) को संपन्न होगा.
पीएम मोदी रविवार को शौर्य यात्रा में लेंगे हिस्सा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार को सुबह लगभग 9:45 बजे शौर्य यात्रा में भाग लेंगे, जो सोमनाथ मंदिर की रक्षा करते हुए प्राणों की आहुति देने वालों को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए आयोजित एक औपचारिक जुलूस है. शौर्य यात्रा में 108 घोड़ों का प्रतीकात्मक जुलूस निकाला जाएगा, जो वीरता और बलिदान का प्रतीक होगा. इस कार्यक्रम को लेकर DIG राजेंदर सिंह ने कहा, 11 जनवरी को एक शौर्य यात्रा का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें गुजरात पुलिस के 108 घोड़े हिस्सा लेंगे. यह गुजरात पुलिस के लिए गर्व की बात है, खासकर जब प्रधानमंत्री खुद इस मौके पर मौजूद रहेंगे. पीएम मोदी सुबह करीब 10:15 बजे सोमनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना करेंगे और फिर सुबह 11 बजे सोमनाथ स्वाभिमान पर्व पर आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम में भाग लेंगे.
पीएम मोदी ॐकार मंत्र के जाप में लेंगे हिस्सा
मोदी ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ के तहत देर शाम सोमनाथ मंदिर में ॐकार मंत्र के जाप में भाग लेंगे. यह कार्यक्रम मंदिर पर 1000 वर्ष पहले हुए आक्रमण की पृष्ठभूमि में आयोजित किया जा रहा है. पीएम मोदी मंदिर परिसर में ड्रोन शो देखेंगे. मंदिर से जुड़ी ऐतिहासिक घटनाओं को दर्शाने के लिए लगभग 3,000 ड्रोन का इस्तेमाल किया जाएगा. इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी श्री सोमनाथ ट्रस्ट के अध्यक्ष के रूप में उसकी बैठक की अध्यक्षता करेंगे.
महमूद गजनी ने 1026 ईस्वी में सोमनाथ मंदिर पर किया था हमला
महमूद गजनी ने 1026 ईस्वी में सोमनाथ मंदिर पर हमला किया था, जिसके 1000 वर्ष पूरे होने पर यह कार्यक्रम आयोजित किया गया है. सदियों से नष्ट करने के कई बार प्रयास किए जाने के बावजूद सोमनाथ मंदिर आज आस्था और राष्ट्रीय गौरव के एक शक्तिशाली प्रतीक के रूप में खड़ा है, यह सब मंदिर की प्राचीन महिमा को बहाल करने के सामूहिक संकल्प और प्रयासों के कारण संभव हुआ है.
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