दिल्ली की अर्थव्यवस्था की रीढ़ व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लोकप्रिय थोक बाजारों में से कुछ को लुभाने की हरियाणा सरकार की गंभीर कोशिशों ने दिल्ली सरकार को सचेत कर दिया है। थोक बाजारों के साथ ही दिल्ली के राजस्व को बाहर जाने से रोकने के लिए राज्य सरकार गंभीरता से काम कर रही है। सरकार से जुड़े सूत्रों के अनुसार, कुछ माह में गोदामों के लिए, साथ ही व्यापार व उद्योग नीति लाने के साथ ही व्यापार कल्याण बोर्ड के गठन व एसआरडीसी का पुनर्गठन किया जाएगा। पुरानी दिल्ली के बाजारों की समस्याओं जैसे भीड़भाड़ और पार्किंग की कमी के कारण कारोबारी बाहर विकल्प तलाश रहे हैं। सरकार इन बाजारों को बेहतर सुविधाएं देने का वादा कर रही है।
पुरानी दिल्ली में सैकड़ों साल से चल रहे थोक बाजारों में समस्याओं की भरमार है। भीड़भाड़ और संकरी गलियों में बसे इन बाजारों में अग्निशमन सेवाओं और एम्बुलेंस का पहुंचना असंभव सा है। इसी तरह, पार्किंग की कमी के कारण वाहनों की अवैध पार्किंग तथा माल चढ़ाने –उतारने में घंटों समय बर्बाद होता है।
कुछ माह में और बड़े निर्णय होंगे। बाजारों को दिल्ली से बाहर नहीं जाने दिया जाएगा। वहीं, भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता प्रवीण शंकर कपूर कहते हैं कि दिल्ली में भाजपा की सरकार बने अभी एक वर्ष भी नहीं हुए हैं, लेकिन व्यापार हित में लिए गए ऐतिहासिक निर्णयों का प्रभाव दिखने लगा है।
दिल्ली के थोक बाजार न केवल व्यापारिक केंद्र हैं, बल्कि ये शहर की जीवंत विरासत और अर्थव्यवस्था की रीढ़ भी हैं। थोक बाजारों की संख्या 300 से अधिक हैं। जिनमें करीब ढाई से तीन लाख कारोबारी प्रतिष्ठान हैं। इसके साथ ही 500 के करीब खुदरा बाजार तथा सात लाख और कारोबारी हैं। एक अनुमान के अनुसार दिल्ली की अर्थव्यवस्था में 65 प्रतिशत का योगदान अकेले व्यापार–उद्योग का है।
पुराने दिल्ली की थोक बाजारों के साथ ही दिल्ली सरकार में भी चिंता देखी जा रही है। माना जा रहा है कि जल्द दिल्ली सरकार के मंत्री व्यापारियों के साथ मंत्रणा कर रोडमैप प्रस्तुत कर सकते हैं। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कुछ माह पूर्व पुरानी दिल्ली के थोक बाजारों को दिल्ली के बाहरी हिस्सों में ले जाने की बात कही थी। सरकार से जुड़े लोगों का कहना है कि दिल्ली का राजस्व हरियाणा जाने से रोकने के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे। उनके अनुसार 10 वर्षों से आप सरकार की बाजारों की उपेक्षा के चलते यह हालात पैदा हुए हैं। रेखा गुप्ता की सरकार अब बाजारों में विकास के साथ बेहतर कारोबारी माहौल पर पर्याप्त ध्यान दे रही है।
जानकारी के अनुसार हरियाणा सरकार की कोशिश है कि खारी बावली, चावड़ी बाजार, भगीरथ पैलेस और कीर्ति नगर जैसे दिल्ली के थोक बाजारों के कारोबारों को सोनीपत के राई में ले आया जाए। जिससे उसकी अर्थव्यवस्था में व्यापार भी जुड़े। मुख्यमंत्री ने हाल ही में व्यापारियों व उद्यमियों के साथ बैठक में चांदनी चौक स्थित भागीरथ पैलेस के इलेक्ट्रिकल बाजार , खारी बावली के सूखे मेवे और मसालों के थोक बाजार के साथ ही कीर्ति नगर स्थित मार्बल मार्केट के लिए सोनीपत के राई में जमीन आवंटित करने की जानकारी दी। इसी तरह, अन्य बाजार भी हरियाणा जाने की कतार में हैं।
हरियाणा के सोनीपत के राई में पुरानी दिल्ली के बाजारों को ले जाने की कवायद पिछले 10 वर्षों से चल रही है। पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के साथ ही हरियाणा के उच्चाधिकारियों के साथ कई दौर की बैठकें हुई। नायब सिंह सैनी सरकार ने भी उसे जारी रखा। अब मौका उसे धरातल पर उतरने का आ गया है.
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