पूर्व रॉ प्रमुख विक्रम सूद ने शनिवार को कहा कि इस्लामाबाद के रवैये में मौलिक बदलाव के बिना पाकिस्तान के साथ शांति संभव नहीं है। बार-बार की दुश्मनी को देखते हुए उसके साथ समझौता या बातचीत करने में बहुत कम फायदा है। सूद ने मंगलुरु लिट फेस्ट में ग्लोबल पावर डायनेमिक्स पर एक सेशन को संबोधित करते हुए यह बात कही। सूद ने कहा कि मुझे पाकिस्तान का भारत के साथ होने वाली समस्याओं का कोई समाधान नहीं दिखता।
उसके नेता खुलेआम घोषणा करते हैं कि उनका इस्लामिक राज्य है। गैर-मुसलमानों के खिलाफ जिहाद जारी रहेगा, और कश्मीर से निपटना उनके लिए जिहाद है। वे बस सही समय का इंतजार कर रहे हैं। पूर्व रॉ चीफ सूद ने भारत की राजनयिक रणनीति, अमेरिका के बढ़ते वैश्विक हस्तक्षेप और श्रीलंका-बांग्लादेश के क्षेत्रीय संकट पर भी अपने विचार रखे।
विक्रम सूद के वक्तव्य की बड़ी बातें…
- अगर हम अभी आगे नहीं बढ़े, तो हमें यह सुनहरा मौका फिर कभी नहीं मिलेगा। डेमोग्राफी, मजबूत लोकतंत्र और नीतियां हमारे पक्ष में हैं।
- देश को बाहरी समर्थन पर निर्भर रहने के बजाय अमेरिका और चीन जैसी प्रमुख शक्तियों के साथ तार्किक रूप से जुड़ना चाहिए।
- प्रभावी शासन के लिए ताकत, सैन्य क्षमता और शक्ति जरूरी हैं। बालाकोट और उरी स्ट्राइक जैसे भारतीय सैन्य अभियान भारत की बढ़ती रणनीतिक मुखरता के संकेत हैं।
- अमेरिका अपनी सैन्य शक्ति के बावजूद, 1940 के दशक के बाद से पारंपरिक युद्ध सीधे तौर पर नहीं जीता है। ट्रंप पश्चिम को नया आकार दे रहे हैं, पूरब तेजी से मजबूत हो रहा है।
जानिए कौन हैं विक्रम सूद
विक्रम सूद ने बतौर RAW चीफ 2000 से 2003 तक एजेंसी का नेतृत्व किया। सूद रॉ चीफ बनने वाले उन कम अधिकारियों में से एक हैं जिन्होंने पुलिस सेवा (IPS) से नहीं बल्कि सिविल सेवा से इस टॉप खुफिया पद तक पहुंचे। रिटायरमेंट के बाद सूद ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन जैसे थिंक टैंक्स के साथ जुड़े हैं, जहां वे सलाहकार और विचारक के रूप में कार्य कर रहे हैं।
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