अशोक कुमार जायसवाल, चंदौली। जिले के मिर्जामुराद थाना क्षेत्र के करधना गांव में रविवार को घटित एक हृदयविदारक हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। आंवला समझकर कनेर की फली का जहरीला बीज खाने से 24 घंटे के भीतर दो सगी बहनों समेत तीन मासूम बच्चियों की दर्दनाक मौत हो गई। इस घटना से गांव में शोक, मातम और आक्रोश का माहौल व्याप्त है। मृत बच्चियों में करधना गांव निवासी मिथलेश प्रजापति की बेटियां हर्षिता (6 वर्ष) और अंशिका (3 वर्ष) तथा पड़ोसी मनीष प्रजापति की बेटी नैंसी (4 वर्ष) शामिल हैं।

खेल-खेल में निगल लिया जहर

जानकारी के अनुसार, रविवार सुबह गांव के सात बच्चे घर से कुछ दूरी पर खेल रहे थे। इसी दौरान उन्हें कनेर की फली मिली, जिसे बच्चों ने आंवला समझकर तोड़ लिया। खेल-खेल में हर्षिता, अंशिका और नैंसी ने कनेर का जहरीला बीज खा लिया। कुछ ही देर में तीनों बच्चियों को पेट दर्द और उल्टियां शुरू हो गईं। हालत बिगड़ने पर वे अपने-अपने घर लौट आईं। शाम तक हर्षिता की तबीयत बेहद गंभीर हो गई। परिजन उसे एक निजी अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

बिगड़ती हालत और एक के बाद एक मौत

परिवार इस सदमे से उबर भी नहीं पाया था कि सोमवार सुबह छोटी बहन अंशिका की भी तबीयत बिगड़ गई और इलाज के दौरान दोपहर में उसकी भी मौत हो गई। इसी बीच पड़ोसी की बेटी नैंसी की हालत भी नाजुक हो गई। परिजन उसे तत्काल बीएचयू ट्रॉमा सेंटर लेकर पहुंचे, जहां इलाज के दौरान उसकी भी मौत हो गई। महज 24 घंटे में तीन मासूम बच्चियों की मौत से पूरे गांव में कोहराम मच गया।

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बिना सूचना हुआ अंतिम संस्कार

बताया जा रहा है कि हर्षिता और अंशिका का अंतिम संस्कार परिजनों ने पुलिस को सूचना दिए बिना ही कर दिया, जबकि नैंसी की मौत की सूचना मिलने पर मिर्जामुराद पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम कराया।हर्षिता और अंशिका के पिता मिथलेश प्रजापति बुनकर हैं और मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। वहीं नैंसी के पिता मनीष प्रजापति बेंगलुरु में ऑटो चालक हैं, जो घटना की जानकारी मिलते ही सोमवार को विमान से गांव पहुंचे। तीनों बच्चियों की असामयिक मौत से दोनों परिवारों का रो-रोकर बुरा हाल है।

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मानवाधिकार आयोग ने लिया संज्ञान

इस गंभीर और संवेदनशील मामले को लेकर मानवाधिकार कार्यकर्ता एवं चंदौली निवासी अधिवक्ता खालिद वकार आबिद ने राज्य मानवाधिकार आयोग में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने प्रशासनिक लापरवाही, ग्रामीण क्षेत्रों में जन-जागरूकता की कमी और बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए। साथ ही पीड़ित परिवारों को तत्काल मुआवजा देने और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की।

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शिकायत पर संज्ञान लेते हुए राज्य मानवाधिकार आयोग ने 08 जनवरी 2026 को आदेश जारी किया। आयोग ने जिलाधिकारी, वाराणसी से पूरे मामले में विस्तृत जांच रिपोर्ट तलब की है। साथ ही यह भी निर्देश दिया गया है कि जांच प्रक्रिया में शिकायतकर्ता अधिवक्ता खालिद वकार आबिद को शामिल किया जाए। जिलाधिकारी को 16 फरवरी 2026 तक रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया गया है, जबकि मामले की अगली सुनवाई 17 फरवरी 2026 को आयोग के समक्ष निर्धारित की गई है।