दिल्ली में अपराध की दुनिया के सफेदपोश ठगों के तरीके जानकर सब हैरान हैं. दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने बैंक लोन के नाम पर करोड़ों की ठगी करने वाले एक शातिर गैंग का पर्दाफाश किया है. ये आरोपी फर्जी आधार और पैन कार्ड के जरिए महंगी गाड़ियां फाइनेंस कराते थे और फिर उन्हें गायब कर देते थे. पुलिस ने मर्सिडीज और स्कॉर्पियो जैसी 5 लग्जरी गाड़ियां बरामद की हैं. अमन और धीरज जैसे मास्टरमाइंड अलग-अलग पहचानों के साथ बैंकों को चूना लगा रहे थे. अब दिल्ली पुलिस जांच कर रही है कि इस फ्रॉड में बैंक के कर्मचारी तो शामिल नहीं हैं? दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच और साइबर सेल ने मिलकर एक ऐसे सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है, जो फर्जी दस्तावेजों के सहारे बैंकों से करोड़ों रुपये का ‘व्हीकल लोन’ डकार रहा था.
जेब में फूटी कौड़ियां नहीं, फिर भी मर्सिडीज-बेंज (Mercedes-Benz), टाटा अल्ट्रोज़ (Tata Altroz). मारुति ब्रेजा (Maruti Brezza), महिंद्रा स्कॉर्पियो-एन (Scorpio-N) और टोयोटा हिल्क्स (Toyota Hilux) जैसे गाड़ियां रखता था. दिल्ली पुलिस ने अब इस पूरे गोरखधंधे की परतों को खोलकर रख दिया. इस कार्रवाई में पुलिस ने न केवल तीन मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है, बल्कि उनके पास से मर्सिडीज और स्कॉर्पियो-एन जैसी 5 लग्जरी गाड़ियां भी बरामद की हैं.
इन गाड़ियों को आरोपियों ने अलग-अलग बैंकों को चूना लगाकर खरीदा था और इन्हें ठिकाने लगाने की फिराक में थे. डीसीपी क्राइम आदित्य गौतम के अनुसार, इन आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं 318(4), 336, 338, 340, 112 और 61(2) के तहत मामला दर्ज किया गया है. इस गैंग का मास्टरमाइंड अमन कुमार उर्फ राहुल कपूर उर्फ श्याम सुंदर है, जो तिलक नगर का रहने वाला है. अमन का तरीका इतना शातिर था कि बैंक के बड़े-बड़े अधिकारी भी मात खा जाते थे. वह एक ही फोटो का इस्तेमाल करके अलग-अलग नामों से फर्जी आधार कार्ड, पैन कार्ड और फर्जी इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) तैयार करता था.
25 दिसंबर 2025 को इंस्पेक्टर संदीप सिंह और इंस्पेक्टर विनय कुमार की टीम को एक गुप्त सूचना मिली थी कि दिल्ली में एक ऐसा गिरोह सक्रिय है जो फर्जी कागजों पर गाड़ियां फाइनेंस करा रहा है. एसीपी अनिल शर्मा की देखरेख में बनी इस टीम ने तकनीकी सर्विलांस और फील्डवर्क के जरिए जाल बिछाया. सबसे पहले अमन कुमार को दबोचा गया. उसकी निशानदेही पर जब छापेमारी हुई, तो पुलिस के भी होश उड़ गए. अमन के पास से फर्जी पहचान पत्र और लोन से जुड़े दर्जनों दस्तावेज बरामद हुए. पूछताछ में उसने कुबूल किया कि लोन की पहली या दूसरी किस्त देने के बाद वह जानबूझकर डिफॉल्ट (Default) कर जाता था, जिससे बैंक उसे एनपीए (NPA) घोषित कर देते थे. इसके बाद वह उन गाड़ियों को दूसरे राज्यों में ले जाकर बेच देता था.
धीरज भी इसी तरह की कार्यप्रणाली अपनाता था. लेकिन सवाल यह था कि इतने सटीक फर्जी आधार कार्ड और सरकारी दस्तावेज बन कहां रहे थे? जांच की सुई नजफगढ़ के ‘साईं दस्तावेज केंद्र’ पर जाकर रुकी. पुलिस ने इस सेंटर के मालिक नरेश कुमार को गिरफ्तार किया. नरेश के पास से आई स्कैनर (Eye Scanner), बायोमेट्रिक स्कैनर, वेब कैमरा और पीवीसी कार्ड बनाने वाली मशीन बरामद हुई. यह वही जगह थी जहां सरकारी रिकॉर्ड में सेंध लगाकर फर्जी पहचान पत्र तैयार किए जा रहे थे.
Follow the LALLURAM.COM MP channel on WhatsApp
https://whatsapp.com/channel/0029Va6fzuULSmbeNxuA9j0m
- छत्तीसगढ़ की खबरें पढ़ने यहां क्लिक करें
- उत्तर प्रदेश की खबरें पढ़ने यहां क्लिक करें
- लल्लूराम डॉट कॉम की खबरें English में पढ़ने यहां क्लिक करें
- खेल की खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
- मनोरंजन की बड़ी खबरें पढ़ने के लिए करें क्लिक


