कुंदन कुमार, पटना। केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के उस बयान पर तगड़ा पलटवार किया है, जिसमें उन्होंने कहा है कि वह मौजूदा सरकार का 100 दिन काम देखने के बाद कुछ बोलेंगे। तेजस्वी के इस बयान पर जवाब देते हुए चिराग पासवान ने कहा कि, जनादेश का इस तरह से अपमान करना ही इनके जनादेश चोरी का कारण बना है। यह लोग वोट चोरी की बात करते हैं। जबकि इनका जानधार चोरी हो गया। इसका कारण ही यही रहा है कि जिस तरीके से इन लोगों ने कहा है कि लोकतंत्र नहीं धनतंत्र जीता है।

चिराग पासवान ने कहा कि, आप कभी ईवीएम पर ठीकरा फोड़िएगा। कभी आप एसआईआर पर ठीकरा फोड़िएगा, जो आपके लिए सही साबित होती है, तो ठीक और नहीं तो फिर सब गलत। ईवीएम से जब यह लोग अपने राज्यों में अपने अपने तरीके कांग्रेस और इनकी सरकार बनती है, तो सब ठीक? और जहां यह लोग हार जाते हैं, तो वहां घपला बाजी हुई है।‌ जब तक यह लोग बैठकर खुद मंथन नहीं करेंगे, तब तक इन लोगों के पाव से जमीन खिसकती जाएगी।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि, 2005 के बाद जो जनादेश 2010 में एनडीए को मिला था, उसके बाद से इन लोगों को राजद और कांग्रेस को पता चल गया था कि यह लोग कहां पर हैं? अगर 2015 नीतीश कुमार नहीं होते तो आरजेडी कभी रिवाइव नहीं होती। 2020 में यूनाइटेड एनडीए रहता और हम अलग चुनाव नहीं लड़ते तो कभी राजद कभी रिवाइव नहीं होती, जिस तरह से इनके पार्टी का जनाधार खिसक रहा है, उससे इनके लोगों का विश्वास उनके प्रति खत्म होता जा रहा है।

चिराग ने तेजस्वी पर तंज कसते हुए कहा कि, लंबे समय तक सत्र चलता है और आप नेता प्रतिपक्ष हैं और पूरे सत्र से गायब रहते हैं। आप कोई सामान्य विधायक नहीं? आप एक संवैधानिक पद नेता प्रतिपक्ष के पद पर आसीन हैं। इतना लंबे समय हो गया रिजल्ट आए हुए और आपने इस हार के लिए अपने विधायकों और कार्यकर्ताओं के साथ कोई संवाद नहीं साधा? कारण नहीं बताया? चर्चा नहीं की। अगर आप मंथन नहीं करेंगे तो इसी तरह से आप इस बार तो बड़े मुश्किल से डबल डिजिट में पहुंचे हैं और अब वह दिन दूर नहीं जब आप नेता प्रतिपक्ष के पद पर जितनी संख्या होनी चाहिए उससे भी दूर हो जाएं।

वहीं, 100 दिनों तक कुछ नहीं बोलूंगा वाले बयान पर चिराग ने कहा कि, बिल्कुल मत बोलिए। आपके पास कुछ बोलने के लिए होगा तभी तो बोलिएगा। क्या बोलिएगा बताइए? इनको तो पहले खुद ही अपनी हार पर बोलना चाहिए। 18 तारीख को तो यह मुख्यमंत्री पद की शपथ ले रहे थे ना? यही अहंकार यही कार्यशैली करने का तरीका यही संवाद हिनता कारण रहा है इस तरीके के परिणाम का। आप सौ दिन नहीं 5 साल तक नहीं बोलिए, उससे क्या जा रहा है?

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