राजधानी दिल्ली के शालीमार बाग इलाके में 10 जनवरी की शाम जो हुआ, उसने न केवल कानून-व्यवस्था की धज्जियां उड़ाईं, बल्कि इंसानियत को भी शर्मसार कर दिया. यह कहानी एक ऐसी बहादुर महिला की है जिसने अपने पति के हत्यारों को सलाखों के पीछे भेजने के लिए अपना सब कुछ दांव पर लगा दिया था, लेकिन अंत में उसे मिली तो सिर्फ मौत. इस खौफनाक वारदात के बाद एक मासूम बच्ची के आंसुओं ने पूरी दिल्ली के दिल को झकझोर कर रख दिया है. पीछे रह गई है एक बिलखती मासूम बेटी, जिसकी रूह कपा देने वाली पुकार सुनकर आज हर आंख नम है. पुलिस की फाइलों में यह सिर्फ एक मर्डर है, लेकिन एक बच्ची के लिए यह उसकी पूरी दुनिया का अंत है.

दिल्ली के शालीमार बाग में न्याय की उम्मीद और हिम्मत की एक मशाल बुझ गई. पति के हत्यारों को सजा दिलाने की जंग लड़ रही एक बहादुर मां की सरेआम गोली मारकर हत्या कर दी गई. पढ़ें दिल्ली पुलिस की नाकामी से एक मासूम जीते जी अनाथ हो गई. पहले बाप का साया उठ गया और मां को भी सिस्टम ने कैसे दिया मार?

चश्मदीदों के मुताबिक, हमलावर पूरी तैयारी के साथ आए थे. जैसे ही महिला अपने घर के पास पहुंची, हत्यारों ने उसे घेर लिया. इससे पहले कि वह कुछ समझ पाती या मदद के लिए चिल्लाती, पॉइंट-ब्लैंक रेंज से उसके सीने में गोली दाग दी गई. खून से लथपथ वह जमीन पर गिर पड़ी. उसकी सांसें टूट रही थीं, लेकिन शायद आखिरी वक्त में भी उसे अपनी उस बेटी की चिंता सता रही होगी, जिसके लिए वह जी रही थी. हमलावर बड़े आराम से हथियार लहराते हुए फरार हो गए, मानो उन्हें कानून का कोई खौफ ही न हो.

अब मेरा कोई नहीं’. इस पूरी वारदात का सबसे दर्दनाक पहलू वह 14 साल की मासूम बच्ची है, जिसने 3 साल के भीतर अपने माता-पिता दोनों को खो दिया. अस्पताल के बाहर बिलखती उस बच्ची के शब्द वहां खड़े हर शख्स की रूह को छलनी कर रहे थे. उसने सिसकते हुए कहा, ‘जिसने मेरे पापा को हमसे छीना, उसी ने आज मेरी मां को भी मार डाला. बच्ची की यह पुकार केवल एक आरोपी के खिलाफ नहीं, बल्कि उस सिस्टम के खिलाफ भी है जो गवाहों को सुरक्षा देने में पूरी तरह नाकाम साबित हुआ है. उसकी आंखों में भविष्य का कोई सपना नहीं, बल्कि सिर्फ मौत का खौफ नाच रहा है. वह बार-बार अपनी मां का नाम पुकारती और फिर चुप हो जाती, मानो उसे यकीन ही नहीं हो रहा कि अब उसे गले लगाने वाला कोई नहीं है.

दिल्ली पुलिस की विफलता पर उठे सवाल यह हत्या केवल एक अपराधी का दुस्साहस नहीं, बल्कि दिल्ली पुलिस की कार्यप्रणाली पर एक गहरा धब्बा है. यह वारदात उस समय हुई जब रचना यादव अपने घर के पास स्थित एक पार्क में कपड़ा सुखाने गई थीं. पार्क में छुपे हमलावरों ने नजदीक से सिर में गोली मारी. मृतक का पति विजेंद्र यादव की भी साल 2023 में जहांगीरपुरी में सरे राह हत्या कर दी गई. आरोपी भरत यादव को हाल ही में हाईकोर्ट से मिली बेल को सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दी थी. रचना यादव ने जमानत रद्द कराने की याचिका दायर की थी. रचना की मासूम बेटी का आरोप है कि अगर दिल्ली पुलिस समय पर सुरक्षा दी होती तो उसकी मां आज जिंदा होती.

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