दिल्ली हाईकोर्ट(Delhi High Court) ने वसंत कुंज इलाके से लगभग एक महीने से लापता तीन बुजुर्गों के मामले में सख्त रुख अपनाते हुए दिल्ली पुलिस(Delhi Police) को तत्काल प्रभावी कार्रवाई करने और उनका पता लगाने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट के समक्ष बुजुर्गों की बेटी ने याचिका दायर कर आरोप लगाया कि उसके माता-पिता का अपहरण किया गया है, उनके घर से चोरी हुई है और पुलिस इस पूरे मामले में गंभीरता नहीं दिखा रही है। अदालत ने पुलिस की निष्क्रियता पर सवाल उठाते हुए मामले में त्वरित और ठोस कदम उठाने को कहा है।
जस्टिस विवेक चौधरी और जस्टिस मनोज जैन की डिवीजन बेंच ने याचिकाकर्ता ओंद्रिला दासगुप्ता की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। याचिका में बताया गया कि ओंद्रिला दासगुप्ता के माता-पिता मिहिर कुमार दासगुप्ता, अनिंदिता दासगुप्ता और उनके चाचा समीर दासगुप्ता 13 दिसंबर 2025 को दोपहर करीब ढाई बजे अपने पालतू कुत्ते के साथ वसंत कुंज के पॉकेट-ए स्थित घर से लापता हो गए थे। इसके बाद से उनका कोई सुराग नहीं मिला है।
याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि इस मामले में अपहरण और चोरी की आशंका है, लेकिन दिल्ली पुलिस ने अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। कोर्ट ने पुलिस की निष्क्रियता पर नाराजगी जताते हुए मामले में त्वरित और प्रभावी कदम उठाने का निर्देश दिया। अदालत ने इस मामले में अगली सुनवाई की तारीख 13 जनवरी 2026 तय की है।
याचिका में बताया गया कि ओंद्रिला दासगुप्ता के माता-पिता मिहिर कुमार दासगुप्ता, अनिंदिता दासगुप्ता और उनके चाचा समीर दासगुप्ता 13 दिसंबर 2025 को दोपहर करीब ढाई बजे अपने पालतू कुत्ते के साथ वसंत कुंज के पॉकेट-ए स्थित घर से लापता हो गए थे। शाम को जब ओंद्रिला दासगुप्ता घर पहुंचीं तो बार-बार फोन करने के बावजूद कोई जवाब नहीं मिला। उनका आरोप है कि घर के अंदर सामान बिखरा हुआ था, जिससे चोरी की आशंका जताई गई। उसी दिन उन्होंने किशनगढ़ थाने में शिकायत दर्ज कराई, जिसे पुलिस ने डेली डायरी में दर्ज किया। याचिका में अपहरण की आशंका भी जताई गई है, जबकि आरोप है कि पुलिस ने मामले में अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।
याचिका के अनुसार, उसी दिन किशनगढ़ थाने में शिकायत दर्ज कराई गई, जिसे पुलिस ने डेली डायरी में दर्ज किया। इसके बाद याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि उनके पूर्व पति शायक सेन ने उन्हें धमकी भरे फोन कॉल किए और दावा किया कि बुजुर्गों का अपहरण उसी ने करवाया है। ओंद्रिला दासगुप्ता ने अदालत को बताया कि 14 और 15 दिसंबर को अतिरिक्त शिकायतें भी दी गईं, जिनमें वॉट्सऐप के माध्यम से धमकी मिलने और इस पूरे मामले में अन्य परिजनों के नाम सामने आने की बात कही गई। याचिका में यह भी कहा गया है कि 16 से 18 दिसंबर के बीच कई बार थाने जाने के बावजूद पुलिस ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।
कोर्ट की शरण ली
तीन लिखित शिकायतें देने के बावजूद एफआईआर दर्ज न होने पर ओंद्रिला दासगुप्ता ने अपने वकील के माध्यम से संविधान के अनुच्छेद 226 और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के तहत दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की। इसके अलावा उन्होंने पटियाला हाउस कोर्ट में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष भी एफआईआर दर्ज कराने के लिए आवेदन दिया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने 6 जनवरी को दिल्ली पुलिस से स्टेटस रिपोर्ट तलब की थी। इस याचिका पर अगली सुनवाई 13 जनवरी 2026 को तय की गई है।
हादसे में दोषी बुजुर्ग को परिवीक्षा पर रिहा किया
साकेत कोर्ट ने 2017 के एक सड़क हादसे में दोषी ठहराए गए 60 वर्षीय महेश चंद्र को जेल भेजने के बजाय प्रोबेशन का लाभ देते हुए रिहा करने का आदेश दिया है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पुरुषोत्तम पाठक ने दोषी की उम्र, मामले के लंबे समय से लंबित रहने और उसकी पारिवारिक जिम्मेदारियों को ध्यान में रखते हुए यह फैसला सुनाया। अदालत ने कहा कि निचली अदालत द्वारा भारतीय दंड संहिता की धारा 279 और 304ए के तहत दी गई एक वर्ष की सजा को इस मामले में प्रोबेशन से प्रतिस्थापित किया जा सकता है। फैसले में यह भी उल्लेख किया गया कि दोषी का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, प्रोबेशन अधिकारी की रिपोर्ट अनुकूल है और मृतक के परिजनों के साथ 13.34 लाख रुपये का मुआवजा समझौता हो चुका है, जिसे अदालत ने एक महत्वपूर्ण कारक माना।
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