वीरेंद्र कुमार/नालंदा। बिहार में विकास और सुशासन के दावों के बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पैतृक जिले नालंदा से सामने आई तस्वीरें सरकारी व्यवस्था की जमीनी हकीकत उजागर कर रही हैं। नालंदा जिले के अस्थावां प्रखंड अंतर्गत गिलानी पंचायत के अम्बा बिगहा गांव में बीते पांच वर्षों से भीषण जलजमाव की समस्या बनी हुई है। गांव की करीब 10 बीघा रैयती जमीन और 15 से 20 घर नाली और पईन के गंदे, बदबूदार पानी में डूबे हुए हैं। जलनिकासी की कोई स्थायी व्यवस्था नहीं होने से गांव की सड़कें अब तालाब में तब्दील हो चुकी हैं।

बच्चों की पढ़ाई पर असर

ग्रामीणों का कहना है कि घर से बाहर निकलना किसी सजा से कम नहीं। लोगों को घुटनों तक गंदे पानी में उतरकर रोजमर्रा के काम करने पड़ते हैं। सबसे अधिक असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ा है। ठंड और बदबूदार पानी से होकर स्कूल जाने को मजबूर बच्चे अब घर से निकलने से डरने लगे हैं।

खेती ठप, नेताओं की जमीन भी डूबी

ग्रामीणों के अनुसार यह डूबी हुई रैयती जमीन जदयू नेता अफरोज आलम की है, जहां कभी खेती होती थी, लेकिन पिछले पांच वर्षों से फसल नहीं हो सकी। ग्रामीण सवाल उठा रहे हैं कि जब सत्ताधारी दल के नेता की जमीन का समाधान नहीं हो पा रहा, तो आम लोगों की हालत क्या होगी।

जनप्रतिनिधियों पर लापरवाही का आरोप

वार्ड नंबर 10 के दर्जनों ग्रामीणों ने मुखिया विजय चौधरी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि शिकायतों और सड़क जाम के बावजूद आज तक स्थायी समाधान नहीं हुआ।

प्रशासन का पक्ष

प्रखंड विकास पदाधिकारी सीमा कुमारी ने बताया कि कई बार पानी निकलवाया गया है। कुछ मकान गैरमजरूआ जमीन पर बने हैं, अतिक्रमण हटाने पर ही स्थायी समाधान संभव है।

बड़ा सवाल

अब सवाल यह है कि जब पूरा गांव गंदे पानी में डूबा हो, तो जिम्मेदारी सिर्फ ग्रामीणों की है या सिस्टम की भी? अम्बा बिगहा की यह तस्वीर सरकार के विकास और सुशासन के दावों पर बड़ा सवाल खड़ा करती है।