रायपुर। युवा चेतना, आत्मबल, राष्ट्रधर्म, सेवा, और निर्भीक कर्म को बल देने वाली रामचरितमानस की ये चौपाइयां स्वामी विवेकानंद के संदेश और राष्ट्रीय युवा दिवस की भावना से गहराई से मेल खाती हैं—स्वधर्म निरत श्रुति पथ गामी। हरि हर कोटि प्रनत अभिलाषी॥ अर्थात् -जो अपने कर्तव्य और धर्म के मार्ग पर चलता है, वही महान होता है। यह चौपाई युवाओं को राष्ट्रधर्म, कर्तव्यनिष्ठा और अनुशासन की प्रेरणा देती है। रामचरितमानस की ये चौपाइयाँ स्पष्ट करती हैं कि आत्मबल, सेवा, निर्भीकता, सत्कर्म और राष्ट्रधर्म भारतीय चेतना के मूल तत्व हैं। स्वामी विवेकानंद ने इन्हीं मूल्यों को आधुनिक संदर्भ में युवाओं के सामने रखा।


भारत में 12 जनवरी केवल एक तारीख नहीं, बल्कि चेतना, आत्मविश्वास और राष्ट्रनिर्माण के संकल्प का दिन है। यही वह दिन है जब भारत अपने महान संन्यासी, विचारक और युगद्रष्टा स्वामी विवेकानंद की जयंती को राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाता है। वर्ष 2026 में भी यह दिवस हमें याद दिलाता है कि किसी भी राष्ट्र का भविष्य उसकी युवा शक्ति में निहित होता है।
स्वामी विवेकानंद का विश्वास था कि समाज में वास्तविक परिवर्तन युवाओं से ही आता है। उन्होंने युवाओं को राष्ट्र की ऊर्जा, चेतना और संकल्प माना। उनके विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने औपनिवेशिक भारत के दौर में थे।

12 जनवरी 1863 को कोलकाता में जन्मे महान संत रामकृष्ण परमहंस के शिष्य स्वामी विवेकानंद का मूल नाम नरेन्द्रनाथ दत्त था। वेदांत दर्शन, उपनिषद, गीता और भारतीय संस्कृति के गहन ज्ञाता विवेकानंद ने भारत की आत्मा को विश्व पटल पर प्रतिष्ठित किया।

1893 में विश्व धर्म सम्मेलन में दिया गया उनका ऐतिहासिक भाषण—“सिस्टर्स एंड ब्रदर्स ऑफ अमेरिका” ने न केवल सभागार को मंत्रमुग्ध कर दिया था उनके इस भाषण ने भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महानता को विश्व के सामने स्थापित कर दिया जो आज भी भारतीय आत्मगौरव का प्रतीक माना जाता है। भारत सरकार ने 1985 में स्वामी विवेकानंद की जयंती को राष्ट्रीय युवा दिवस घोषित किया। राष्ट्रीय युवा दिवस का उद्देश्य युवाओं को राष्ट्रनिर्माण की जिम्मेदारी का अहसास कराना, उनके विचारों से प्रेरणा लेकर चरित्र निर्माण को बढ़ावा देना, कौशल, नेतृत्व और सेवा की भावना को विकसित करना है। राष्ट्रीय युवा दिवस का दिन केवल उत्सव का नहीं बल्कि आत्ममंथन का एक महान अवसर भी है कि हम अपने विचार, कर्म और लक्ष्य को किस दिशा में ले जा रहे हैं।

12 जनवरी 2026, हम राष्ट्रीय युवा दिवस के साथ-साथ स्वामी विवेकानंद की जयंती मना रहे हैं। स्वामी जी ने हमें ‘उठो, जागो और लक्ष्य प्राप्ति तक मत रुको’ का मंत्र दिया। उन्होंने युवाओं से साहस, आत्मविश्वास और राष्ट्रसेवा का आह्वान किया। आइए, आज हम संकल्प लें कि उनके विचारों को अपने जीवन में उतारेंगे।

1897 में किसी ने स्वामी विवेकानंद से पूछा—“स्वामीजी, मेरा धर्म क्या है? स्वामी जी ने उत्तर दिया—“गुलाम का कोई धर्म नहीं होता। अगले पचास वर्षों तक तुम्हारा एकमात्र धर्म भारत को गुलामी से मुक्त कराना होना चाहिए।”यह कथन केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि मानसिक स्वतंत्रता का उद्घोष था। आज भी यह विचार युवाओं को मानसिक गुलामी, हीनभावना और डर से मुक्त होने की प्रेरणा देता है।

स्वामी विवेकानंद का संदेश हमेशा संकीर्णता के विरुद्ध था। वे चाहते थे कि दुनिया के हर धर्म की पताका पर लिखा हो—विवाद नहीं, सहायता, विनाश नहीं, संवाद, मतभेद नहीं, समन्वय, अशांति नहीं, शांति
आज के वैश्विक तनावों और सामाजिक विभाजनों के बीच यह संदेश और भी अधिक प्रासंगिक हो गया है।

स्वामी विवेकानंद ने कहा था—“नया भारत मोची की दुकान से, फैक्ट्रियों से, खेत-खलिहानों से, जंगलों और पहाड़ों से उभरेगा।”उनके लिए राष्ट्रनिर्माण का अर्थ केवल सत्ता या शहरी विकास नहीं था, बल्कि समावेशी भारत का निर्माण था, जहां हर वर्ग, हर श्रम और हर प्रतिभा का सम्मान हो।सत्संग चुनो—संगति जीवन की दिशा तय करती है। संघर्ष से मत घबराओ—यही शक्ति देता है। शारीरिक बल अपनाओ—“गीता समझनी है तो फुटबॉल खेलो”,आत्मविश्वास रखो, बड़े सपने देखो, सेवा को जीवन का उद्देश्य बनाओ, डर को त्यागो, चरित्र निर्माण को प्राथमिकता दो, राष्ट्र को सर्वोपरि रखो, कर्म करते रहो, परिणाम की चिंता मत करो
 स्वामी विवेकानंद ने रामकृष्ण मिशन की स्थापना कर शिक्षा, स्वास्थ्य और समाजसेवा का एक ऐसा मॉडल प्रस्तुत किया जो आज भी लाखों लोगों के जीवन को दिशा दे रहा है।

यह मिशन उनके विचारों की जीवंत अभिव्यक्ति है। आज का युवा तकनीक, नवाचार और वैश्विक अवसरों से जुड़ा है लेकिन साथ ही चुनौतियाँ भी हैं—भ्रम, तनाव और लक्ष्यहीनता। ऐसे समय में विवेकानंद के विचार आंतरिक शक्ति और स्पष्ट दिशा प्रदान करते हैं।राष्ट्रीय युवा दिवस हमें यह प्रश्न पूछने के लिए प्रेरित करता है कि “मैं, एक युवा के रूप में, समाज और राष्ट्र के लिए क्या कर सकता हूँ?”

स्वामी विवेकानंद का जीवन हमें सिखाता है कि सच्ची सफलता ज्ञान, सेवा और आत्मबल से प्राप्त होती है। उनकी जयंती पर मनाया जाने वाला राष्ट्रीय युवा दिवस केवल श्रद्धांजलि नहीं, बल्कि कार्य का आह्वान है।आइए, 12 जनवरी 2026 को हम यह संकल्प लें कि—हम निर्भीक बनेंगे, हम जिम्मेदार नागरिक बनेंगे, और स्वामी विवेकानंद के विचारों को जीकरभारत को एक बार फिर विश्वगुरु बनाने की दिशा में कदम बढ़ाएंगे।

लेखक – संदीप अखिल सलाहकार संपादक न्यूज 24 मध्यप्रदेश छत्तीसगढ़ / लल्लूराम डॉट कॉम