पटना। पूर्व केंद्रीय मंत्री आरसीपी सिंह की जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) में वापसी को लेकर राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। कयास लगाए जा रहे हैं कि खरमास के बाद जदयू से अलग हुए आरसीपी सिंह एक बार फिर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ राजनीतिक मंच साझा कर सकते हैं।

दही-चूड़ा भोज में दिखे सियासी संकेत

रविवार को पटेल सेवा संघ की ओर से आयोजित दही-चूड़ा भोज कार्यक्रम में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और आरसीपी सिंह दोनों पहुंचे। हालांकि दोनों मंच पर एक साथ नजर नहीं आए, लेकिन कार्यक्रम से निकलते समय आरसीपी सिंह के बयान ने राजनीतिक चर्चाओं को हवा दे दी।

नीतीश को बताया अभिभावक

मीडिया से बातचीत में आरसीपी सिंह ने नीतीश कुमार को अपना अभिभावक बताया। उन्होंने कहा कि उनका रिश्ता किसी एक पद या अवसर से नहीं, बल्कि 25 वर्षों के भरोसे और सहयोग पर आधारित है। जब उनसे जदयू में वापसी को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा-इसका जवाब आपको जल्द मिल जाएगा।

भारत रत्न की मांग का समर्थन

आरसीपी सिंह ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को भारत रत्न दिए जाने की मांग का भी समर्थन किया। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार का योगदान बिहार ही नहीं, देश की राजनीति में ऐतिहासिक रहा है।

कौन हैं आरसीपी सिंह

63 वर्षीय आरसीपी सिंह मूल रूप से नालंदा जिले के रहने वाले हैं। वे उत्तर प्रदेश कैडर के पूर्व IAS अधिकारी रह चुके हैं। 1996 में केंद्रीय मंत्री रहे नीतीश कुमार की नजर उन पर पड़ी। 2005 से 2010 तक वे नीतीश कुमार के प्रधान सचिव रहे और धीरे-धीरे जदयू में नंबर-2 नेता बन गए। हालांकि बीजेपी से नजदीकी और पार्टी तोड़ने के आरोपों के बाद उन्होंने 7 अगस्त को जदयू से इस्तीफा दे दिया था।