पॉलिटिकल कंसल्टेंसी फर्म ‘इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी’ (I-PAC) के कोलकाता दफ्तर और कंपनी के डायरेक्टर प्रतीक जैन के आवास पर छापेमारी के मामले में ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है. ईडी ने पश्चिम बंगाल सरकार, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, राज्य के डीजीपी राजीव कुमार और कोलकाता पुलिस कमिश्नर मनोज वर्मा के खिलाफ अनुच्छेद 32 के तहत याचिका दायर की है. प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने दावा किया है कि हवाला के जरिये 20 करोड़ रुपये कोलकाता से गोवा स्थित इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमिटी (I-PAC) के दफ्तर तक पहुंचाया गया. ईडी ने कलकत्ता हाईकोर्ट में दायर याचिका में कहा कि इस पैसे को जानबूझकर छह अलग-अलग लेन-देन के जरिये घुमाया गया, ताकि उसके स्रोत को छिपाया जा सके.

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, डीजीपी राजीव कुमार और कोलकाता पुलिस कमिश्नर मनोज वर्मा के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है. ED ने आरोप लगाया है कि 8 जनवरी 2026 को I-PAC और प्रतीक जैन के ठिकानों पर हुई वैधानिक छापेमारी के दौरान जांच में बाधा डाली गई, सबूतों से छेड़छाड़ हुई और जब्त डिजिटल उपकरण जबरन ले लिए गए.

यह मामला ₹2,742.32 करोड़ के कोयला तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग घोटाले से जुड़ा है. ईडी का दावा है कि इस घोटाले से जुड़े 20 करोड़ रुपये से अधिक की राशि हवाला चैनलों के जरिए IPAC तक पहुंचाई गई. ईडी ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी करीब 100 से अधिक पुलिसकर्मियों के साथ प्रतीक जैन के आवास पर पहुंचीं और सर्च के दौरान ईडी अधिकारियों को रोका गया. आरोप है कि जब्त किए गए लैपटॉप, मोबाइल फोन और दस्तावेज जबरन लेकर पुलिस कस्टडी में लगभग दो घंटे तक रखे गए.

ईडी ने अपनी याचिका में कहा है कि यह सर्च ऑपरेशन धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) की धारा 17 के तहत “रीजन टू बिलीव” दर्ज करने के बाद किया गया था. छापेमारी दो स्थानों पर हुई- कोलकाता के पार्क स्ट्रीट स्थित प्रतीक जैन के आवास और बिधाननगर के सेक्टर-वी में स्थित इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी कंसल्टिंग प्राइवेट लिमिटेड (IPAC) के दफ्तर में.

ईडी ने अपनी याचिका में यह भी कहा है कि कलकत्ता हाई कोर्ट की कार्यवाही के दौरान सत्तारूढ़ दल के समर्थकों द्वारा कथित तौर पर हंगामा किया गया, जिसके चलते न्यायालय ने माहौल को सुनवाई के लिए प्रतिकूल बताया. ED का तर्क है कि ऐसे हालात में हाई कोर्ट में वैकल्पिक उपाय प्रभावहीन हो गया है.

ED ने मुख्यमंत्री, डीजीपी, पुलिस कमिश्नर और अन्य संबंधित अधिकारियों की भूमिका की CBI जांच की मांग की है. एजेंसी का कहना है कि इन घटनाओं में BNS, 2023 के तहत चोरी, डकैती, आपराधिक अतिक्रमण, सरकारी कर्मियों के कार्य में बाधा, सबूत नष्ट करने और आपराधिक धमकी जैसे संज्ञेय अपराध बनते हैं.

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