चुनाव आयोग ने हाल ही में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) के तहत पूर्व नेवी चीफ एडमिरल अरुण प्रकाश (रिटायर्ड) को नोटिस भेजा, जिसमें उनसे अपनी और अपनी पत्नी की पहचान साबित करने को कहा गया था. इसे लेकर अब चुनाव आयोग ने सोमवार (12 जनवरी 2026) को स्पष्टीकरण दिया, जिसमें कहा गया है कि उनके कैलकुलेशन फॉर्म में पिछली एसआईआर से संबंधित अनिवार्य विवरण शामिल नहीं थे.
पहचान स्थापित करने के लिए बुलाया गया था
चुनाव आयोग ने सेवानिवृत्ति के बाद से गोवा में रह रहे अरुण प्रकाश को एसआईआर प्रक्रिया के तहत अपनी पहचान स्थापित करने के लिए बुलाया था. सशस्त्र बलों से सेवानिवृत्त हुए कर्मियों सहित कई लोगों ने प्रकाश को इस तरह का नोटिस भेजे जाने पर सोशल मीडिया पर चिंता व्यक्त की थी. अरुण प्रकाश को 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में उनकी भूमिका के लिए वीर चक्र से सम्मानित किया गया था.
इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर डॉ. मेडोरा एरमोमिला डी कोस्टा ने सोमवार को जारी एक स्पष्टीकरण में कहा, ‘एसआईआर के दौरान जारी नोटिस से संबंधित मीडिया की खबरों के संदर्भ में यह स्पष्ट किया जाता है कि एसआईआर के दौरान, कोर्टालिम विधानसभा क्षेत्र के भाग संख्या 43 के बूथ स्तरीय अधिकारी (बीएलओ) ने श्री अरुण प्रकाश से संबंधित कैलकुलेशन फॉर्म जमा किया था.’
पूर्व नेवी चीफ एडमिरल को क्यों भेजा गया नोटिस?
उन्होंने कहा, ‘यह देखा गया कि उक्त कैलकुलेशन फॉर्म में पिछले एसआईआर से संबंधित अनिवार्य विवरण शामिल नहीं थे, जिनमें मतदाता का नाम, ईपीआईसी नंबर, रिश्तेदार का नाम, विधानसभा क्षेत्र का नाम और संख्या, भाग संख्या और मतदाता सूची में क्रम संख्या शामिल हैं.’
अधिकारी ने बताया कि इन आवश्यक पहचान विवरणों के अभाव में, ‘बीएलओ एप्लिकेशन’ प्रस्तुत गणना प्रपत्र और मौजूदा वोटर लिस्ट डेटाबेस के बीच ऑटोमेटिक कनेक्शन स्थापित करने में असमर्थ था. स्पष्टीकरण में कहा गया है, ‘चूंकि पिछली एसआईआर से संबंधित सभी जानकारियां नहीं दी गई थीं, इसलिए सिस्टम ने कैलकुलेशन फॉर्म को अनमैप कैटेगरी के अंतर्गत वर्गीकृत किया.’
ECI के नोटिस पर एडमिरल अरुण प्रकाश का जवाब
पूर्व नेवी चीफ अरुण प्रकाश ने एक्स पर पोस्ट कर कहा, ‘मुझे न तो किसी स्पेशल सविधा की जरूरत है और न ही मैंने 20 साल पहले रिटायर होने के बाद कभी ऐसी कोई मांग की है. मैंने और मेरी पत्नी ने आवश्यकतानुसार एसआईआर का फॉर्म भरा था और चुनाव आयोग की वेबसाइटर पर गोवा की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में अपना नाम देखकर खुश था. हालांकि हम चुनाव आयोग के नोटिस का पालन करेंगे.’
‘एसआईआर प्रक्रिया के तहत सत्यापन अनिवार्य है’
डी कोस्टा ने कहा, ‘बीएलओ एप्लिकेशन को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि यह निर्धारित पहचान विवरण विधिवत भरे जाने पर ही कैलकुलेशन फॉर्म का स्वचालित रूप से मिलान करता है, जिससे मौजूदा वोटर लिस्ट से सत्यापन संभव हो पाता है. यदि कैलकुलेशन फॉर्मों का मिलान नहीं हो पाता है तो एसआईआर प्रक्रिया के तहत सुनवाई तंत्र के माध्यम से आगे सत्यापन अनिवार्य है.’ डी कोस्टा ने कहा कि मानक, सिस्टम-आधारित प्रक्रिया के अनुसार, मतदाता के विवरण के सत्यापन और पात्रता की पुष्टि के लिए उचित अवसर सुनिश्चित करने के वास्ते सुनवाई नोटिस स्वचालित रूप से तैयार करके जारी किया गया था.
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