बांग्लादेश में राजनीतिक अशांति के बीच जाने-माने गायक और आवामी लीग के हिंदू नेता प्रोलोय चाकी (60) की रविवार रात को पुलिस हिरासत में मौत हो गई। प्रशासन ने उनकी मौत को पुरानी बीमारियों की जटिलताओं के कारण स्वाभाविक मृत्यु बताया है, जबकि चाकी के परिवार ने लापरवाही और पर्याप्त चिकित्सा देखभाल से वंचित करने का आरोप लगाया है। चाकी की मौत ऐसे समय पर हुई है, जब बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं की सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

अगस्त में गिरफ्तार हुए थे चाकी

डेली स्टार के मुताबिक, उनको जुलाई-अगस्त 2024 में हुए विद्रोह के दौरान विस्फोट के एक मामले में पाबना के दिलालपुर में उनके आवास से गिरफ्तार किया गया था। तब से वह हिरासत में थे। पाबना जेल के अधीक्षक मोहम्मद उमर फारुक ने कहा कि चाकी मधुमेह और हृदय रोग सहित कई स्वास्थ्य समस्याओं से पीड़ित थे। शुक्रवार को हृदयाघात के बाद उन्हें पहले पाबना जनरल अस्पताल, फिर राजशाही मेडिकल कॉलेज लाया गया था, जहां रविवार रात उन्होंने दम तोड़ दिया।

परिवार ने लगाया आरोप

चाकी के बेटे सोनी चाकी ने कहा कि उनके पिता को किसी भी मामले में नामजद न होने के बावजूद गिरफ्तार कर लिया गया था। बाद में उन्हें 4 अगस्त की हिंसा से जुड़े विस्फोटक मामले में गिरफ्तार दिखाया गया। सोनी ने आरोप लगाया कि जेल में उनकी हालत बिगड़ने के बाद भी अधिकारियों ने आधिकारिक तौर पर इसकी सूचना नहीं दी। वे दूसरों से सूचना मिलने के बाद अस्पताल पहुंचे थे। जेल अधीक्षक ने आरोपों को खारिज किया है।

कौन थे चाकी?

प्रोलोय चाकी 1990 के दशक से अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग की पाबना जिला के सांस्कृतिक मामलों के सचिव और विख्यात गायक और संगीत निर्देशक थे। उन्होंने पाबना स्थित श्रीश्री राम कृष्ण शेबाश्रम के सचिव के रूप में भी कार्य किया था और उत्तरी बांग्लादेश में अवामी लीग के एक प्रमुख आयोजक थे। उन्होंने दशकों तक संगीत और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का उपयोग लोगों को एकजुट करने और धर्मनिरपेक्ष-प्रगतिशील मूल्यों को बढ़ावा देने के लिए किया था।

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