मनोज यादव, कोरबा। जिले में धान खरीदी व्यवस्था में लगातार सामने आ रही अनियमितताओं की वजह से परेशान एक और किसान ने जहर का सेवन कर आत्महत्या का प्रयास किया है। बीते 24 घंटे के भीतर इस तरह की यह दूसरी घटना है। मामले की सूचना के बाद जिला प्रशासन में हड़कंप मच हुआ है।

जानकारी के अनुसार हरदी बाजार थाना क्षेत्र के झांझ गांव निवासी 60 वर्षीय किसान बैसाखू मरकाम ने धान खरीदी से जुड़ी समस्याओं से परेशान होकर हरदी बाजार तहसील कार्यालय के सामने कीटनाशक का सेवन कर लिया। जहर सेवन के बाद उनकी हालत गंभीर हो गई, जिसके बाद उन्हें तत्काल हरदी बाजार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है।
बताया जा रहा है कि बैसाखू मरकाम लंबे समय से धान खरीदी से जुड़ी परेशानियों का सामना कर रहे थे। टोकन, रकबा और अन्य प्रक्रियात्मक दिक्कतों के चलते उनका धान नहीं बिक पा रहा था। लगातार दफ्तरों के चक्कर लगाने और समाधान नहीं मिलने से वह मानसिक रूप से काफी परेशान थे। इसी हताशा में उन्होंने यह कदम उठाया।
1 दिन पहले कोरबी निवासी किसान ने पिया था जहर
गौरतलब है कि हरदी बाजार क्षेत्र में यह 24 घंटे के भीतर किसानों द्वारा जहर सेवन की दूसरी घटना है। इससे एक दिन पहले हरदी बाजार के कोरबी निवासी किसान सुमेर सिंह गोड़ ने भी धान बिक्री का टोकन नहीं मिलने से परेशान होकर कीटनाशक का सेवन किया था। उस मामले में कोरबा सांसद ज्योत्सना महंत मौके पर पहुंची थीं और अस्पताल जाकर किसान से मुलाकात कर सरकार पर गंभीर आरोप लगाए थे।

लगातार सामने आ रही इन घटनाओं से धान खरीदी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। किसानों का कहना है कि ऑनलाइन टोकन प्रणाली, रकबा निर्धारण और प्रशासनिक लापरवाही के कारण उन्हें भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। समय पर धान नहीं बिकने से आर्थिक संकट गहराता जा रहा है, जिससे किसान मानसिक दबाव में आ रहे हैं।

इधर, बैसाखू मरकाम द्वारा आत्महत्या के प्रयास की सूचना मिलते ही प्रशासन हरकत में आया है। राजस्व और कृषि विभाग के अधिकारी मामले की जानकारी जुटा रहे हैं। हालांकि, लगातार हो रही घटनाओं ने प्रशासन की कार्यप्रणाली और धान खरीदी व्यवस्था की प्रभावशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
फिलहाल बैसाखू मरकाम का इलाज जारी है। परिजन और ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि धान खरीदी में व्याप्त अनियमितताओं को तत्काल दूर किया जाए, ताकि भविष्य में कोई और किसान इस तरह का कदम उठाने को मजबूर न हो।
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