शरद पाठक, छिंदवाड़ा। मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा के फव्वारा चौक पर सोमवार शाम एक डेढ़ साल का बच्चा गंभीर स्थिति में फंसा मिला।  मासूम के माता-पिता शॉपिंग में व्यस्त थे और कार वहीं खड़ी छोड़ आए थे। दंपति के कार की चाबी गाड़ी के अंदर ही रह गई थी, जिससे  कार लॉक हो गई। कुछ ही समय में भीड़ जमा हो गई और कार के भीतर अकेला बैठा मासूम जोर-जोर से रोने लगा, जिससे लोगों को उसकी खतरनाक स्थिति का अंदाजा हुआ।

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राहगीरों ने बच्चे की ओर देखा और आसपास के लोगों को जानकारी दी, लेकिन माता-पिता शुरुआत में कहीं नजर नहीं आएं। भीड़ बढ़ती गई और बच्चे की चिंता बढ़ने लगी। क्योंकि कार के अंदर की हालत बच्चे के लिए काफी असहज और खतरनाक हो सकती थी। भीड़ ने पहले दरवाजा खोलने की कोशिश की, लेकिन सफल नहीं हो सकी। मौके पर मौजूद एक अस्पताल कर्मी, निलेश नामक व्यक्ति, तुरंत निर्णय लेकर कार का कांच तोड़कर अंदर पहुंचा और बच्चे को सुरक्षित बाहर निकालकर भीड़ की मदद से उसे सुरक्षित जगह पर ले आया। लोगों ने यह कहते हुए राहत की सांस ली कि जवान की तुरंत कार्रवाई ने बच्चे की जान बचाई अन्यथा गाड़ी के अंदर थोड़ी देर और फँसे रहने से हालत अधिक गंभीर हो सकती थी। बाद में बच्चे के माता-पिता भी मौके पर पहुंचे और स्थिति को संभाला।

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 घटना ने एक बार फिर यह सिखाया कि बच्चों को बिना निगरानी कार में अकेला छोड़ना कितना खतरनाक हो सकता है और हमेशा सावधान रहने की जरूरत होती है ताकि ऐसी नाजुक स्थिति दोबारा न हों।

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