समस्तीपुर। लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) की सांसद और देश की सबसे युवा सांसद शांभवी चौधरी एक बार फिर सांसद निधि (MPLADS) को लेकर चर्चा में हैं। दो साल बीत जाने के बावजूद सांसद निधि से एक भी रुपया खर्च न करने के सवाल पर उन्होंने विपक्ष के आरोपों को बेवजह बताया और साफ कहा कि विपक्ष अनावश्यक हाय-तौबा मचा रहा है।
एमपी फंड खर्च करना मेरा अधिकार
समस्तीपुर में एक कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से बातचीत में शांभवी चौधरी ने कहा कि सांसद निधि खर्च करना उनका निजी अधिकार है। वे विपक्ष के दबाव में आकर फंड खर्च नहीं करेंगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि एमपी फंड से विकास कार्यों का निर्णय पार्टी और एनडीए कार्यकर्ताओं की सहमति से लिया जाएगा। जब कार्यकर्ता तय करेंगे कि किस क्षेत्र में और किस मद में राशि खर्च होनी चाहिए, तभी फंड का उपयोग किया जाएगा।
विपक्ष पर झूठा नैरेटिव गढ़ने का आरोप
सांसद शांभवी ने विपक्ष पर विकास को लेकर झूठा नैरेटिव गढ़ने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि अगर एनडीए सरकार के दौरान विकास नहीं हुआ होता, तो पिछले विधानसभा चुनाव में एनडीए को इतनी बड़ी जीत नहीं मिलती।
बिहार के सांसदों का रिपोर्ट कार्ड
दरअसल, 2024 लोकसभा चुनाव के बाद गठित 18वीं लोकसभा का दूसरा वित्तीय वर्ष लगभग पूरा होने वाला है। इस दौरान बिहार के 40 लोकसभा सांसदों में से 6 सांसद ऐसे हैं, जिन्होंने अब तक सांसद निधि से एक भी रुपया खर्च नहीं किया है। इनमें से 5 सांसद एनडीए से जुड़े हैं, जिससे विपक्ष को सरकार पर सवाल उठाने का मौका मिला है।
एमपी फंड के आंकड़े
MPLADS के तहत प्रत्येक सांसद को सालाना 5 करोड़ रुपये मिलते हैं। पांच वर्षों में यह राशि 25 करोड़ रुपये होती है। बिहार के सांसदों को कुल मिलाकर लगभग 1000 करोड़ रुपये मिलने हैं। अब तक प्रत्येक सांसद को करीब 9.80 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं, लेकिन बिहार में केवल 137.69 करोड़ रुपये ही खर्च हुए हैं, जबकि 394.46 करोड़ रुपये के कार्यों को स्वीकृति दी गई है।
बिना खर्च वाले सांसदों की सूची
एमपी फंड से एक भी रुपया खर्च न करने वालों में पाटलिपुत्र से राजद सांसद मीसा भारती का नाम सबसे ऊपर है। उनके अलावा बीजेपी के राजीव प्रताप रूडी (सारण), संजय जायसवाल (पश्चिम चंपारण), विवेक ठाकुर (नवादा), जदयू के ललन सिंह (मुंगेर) और लोजपा (रामविलास) की सांसद शांभवी चौधरी भी शामिल हैं।
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