इदरीश मोहम्मद, पन्ना। मध्य प्रदेश के पन्ना नगर पालिका से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने सिस्टम की ‘साफ-सफाई’ की पोल खोलकर रख दी है। ज़रा सोचिए, जिसे आप अपनी प्यास बुझाने के लिए पी रहे हैं, अगर वो नाले का गंदा पानी बन जाए तो आप क्या करेंगे ?
दरअस, मामला वार्ड नंबर-14 का है… जहां पिछले तीन दिनों से नलों से पानी नहीं बल्कि ‘बीमारियों का सीवेज’ सप्लाई हो रहा है। जनता का गला सूखा तो गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। हद तो तब हो गई जब शिकायतों के बाद भी अधिकारी ‘कुंभकर्णी नींद’ से नहीं जागे। मंगलवार को जब पार्षद वैभव थापक हाथ में गंदे पानी की बोतल लेकर सीधे CMO के चैंबर में दाखिल हुए, तो वहां मौजूद अफसरों के पसीने छूट गए।
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पार्षद ने दो टूक शब्दों में पूछा कि ‘क्या यही पानी साहब के घर भी जाता है?’ इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों का हवाला देते हुए पार्षद ने चेताया कि प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतज़ार न करे। अब इस ‘गंदे संग्राम’ के बाद पन्ना की जनता को साफ पानी मिलता है या सिर्फ आश्वासन का घूंट!” यह देखने वाली बात है।
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