Rajasthan News: जयपुर। पंचायत और निकाय चुनाव से पहले राजस्थान सरकार बड़ा फैसला लेने की तैयारी में है. दो संतान बाध्यता से जुड़े करीब 30 साल पुराने कानूनी प्रावधान को समाप्त करने के लिए सरकार विधेयक लाने जा रही है. प्रस्तावित संशोधन के बाद तीन संतान होने पर भी उम्मीदवार पंचायत और नगरीय निकाय चुनाव लड़ने के पात्र होंगे.

विधानसभा के आगामी बजट सत्र के लिए विधेयकों की तैयारी तेज हो गई है. पंचायती राज और नगरीय विकास विभाग की ओर से दो संतान संबंधी नियम में संशोधन का ड्राफ्ट अंतिम चरण में है. सरकार इन संशोधनों को अध्यादेश के बजाय विधेयक के रूप में विधानसभा में पेश करेगी. इसके साथ ही दो अन्य अध्यादेशों के स्थान पर लाए जाने वाले विधेयकों को भी अंतिम रूप दिया जा रहा है. कुल चार विधेयक बजट सत्र में सदन के पटल पर रखे जाएंगे.

अध्यादेश की जगह अब विधेयक

सरकार पहले 1994 के पंचायती राज अधिनियम और 2009 के नगरपालिका अधिनियम में अध्यादेश के जरिए संशोधन की तैयारी कर रही थी, लेकिन अध्यादेश नहीं लाया गया. अब इन दोनों कानूनों में बदलाव के लिए विधेयक लाने की प्रक्रिया अपनाई जा रही है. संबंधित विभागों ने ड्राफ्ट तैयार कर विधि विभाग को भेज दिए हैं, जहां उन्हें अंतिम रूप दिया जा रहा है.

इन अध्यादेशों की जगह आएंगे विधेयक

राजस्थान जन विश्वास (प्रावधानों का संशोधन) अध्यादेश-2025 के स्थान पर लाए जाने वाले विधेयक में वन अधिनियम, काश्तकारी अधिनियम सहित अन्य छोटे अपराधों में मुकदमा चलाने की बजाय जुर्माना लगाने का प्रावधान किया गया है.
वहीं राजस्थान दुकान एवं वाणिज्यिक प्रतिष्ठान (संशोधन) अध्यादेश-2025 के स्थान पर प्रस्तावित विधेयक में श्रम कानूनों में संशोधन किया गया है. इसके तहत 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों को दुकानों और वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों में काम करने की अनुमति नहीं होगी. प्रशिक्षु बनने की न्यूनतम आयु 12 से बढ़ाकर 14 वर्ष की जाएगी. 14 से 18 वर्ष आयु वर्ग के किशोरों से रात में काम नहीं कराया जाएगा. साथ ही दैनिक कार्य अवधि 9 घंटे से बढ़ाकर 10 घंटे और तिमाही ओवरटाइम सीमा 126 घंटे से बढ़ाकर 144 घंटे करने का प्रावधान किया गया है.

अब तक क्या था नियम

वर्तमान प्रावधानों के अनुसार 27 नवंबर 1995 के बाद तीसरी संतान होने पर कोई भी व्यक्ति पंच, सरपंच, उपसरपंच, पंचायत समिति सदस्य, जिला परिषद सदस्य, प्रधान, प्रमुख, पार्षद, सभापति या महापौर का चुनाव नहीं लड़ सकता. गलत जानकारी देकर चुनाव लड़ने पर पद समाप्त होने के साथ जेल की सजा का भी प्रावधान है. यह नियम राजस्थान नगरपालिका अधिनियम की धारा 24 और पंचायती राज अधिनियम में लागू है.

लंबे समय से चल रहा था विवाद

राज्य में दो संतान का नियम जनप्रतिनिधियों और सरकारी कर्मचारियों दोनों पर लागू किया गया था. बाद में सरकारी कर्मचारियों को वेतन वृद्धि और पदोन्नति के मामलों में इस नियम में शिथिलता दी गई, लेकिन पंचायत और निकाय चुनाव में दो से अधिक संतान वालों पर लगी पाबंदी बरकरार रही. कई अन्य राज्यों ने यह प्रावधान वर्षों पहले ही समाप्त कर दिया है. अब राजस्थान सरकार भी इस दिशा में कदम बढ़ाने जा रही है.

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