नई दिल्ली। भारत अपनी आसमानी ताकत में एक बड़ी उछाल के लिए तैयार है. सूत्रों के अनुसार, सरकार इस हफ़्ते रक्षा मंत्रालय की एक उच्च-स्तरीय बैठक में फ्रांस से 114 राफेल फाइटर जेट खरीदने के लिए 3.25 लाख करोड़ रुपये के बड़े प्रस्ताव पर विचार करने वाली है.
सूत्रों ने बताया कि इस प्रस्ताव के तहत ज़्यादातर राफेल जेट भारत में ही बनाए जाएंगे, जिनमें लगभग 30 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री होगी, जबकि 12-18 विमान भारतीय वायु सेना (IAF) के लिए उड़ने की स्थिति में खरीदे जाएंगे.
उम्मीद है कि अगले दो से तीन दिनों में होने वाली रक्षा मंत्रालय की वरिष्ठ-स्तरीय बैठक में इस मामले पर चर्चा होगी. सूत्रों ने बताया कि सरकार-से-सरकार डील के हिस्से के रूप में, भारत राफेल प्लेटफॉर्म पर भारतीय हथियारों और अन्य स्वदेशी प्रणालियों को इंटीग्रेट करने के लिए फ्रांस की मंज़ूरी भी मांग रहा है. हालांकि, सोर्स कोड फ्रांसीसी पक्ष के पास ही रहेंगे.
अगर मंज़ूरी मिल जाती है, तो यह डील भारत का अब तक का सबसे बड़ा रक्षा सौदा हो जाएगा, और भारतीय सेवा में राफेल जेट की कुल संख्या 176 हो जाएगी. IAF वर्तमान में 36 राफेल का संचालन करता है, जबकि भारतीय नौसेना ने पिछले साल 26 राफेल-M जेट के लिए ऑर्डर दिए थे.
सूत्रों ने बताया, “भारतीय वायु सेना द्वारा तैयार किए गए 114 राफेल जेट के लिए स्टेटमेंट ऑफ केस (SoC) या प्रस्ताव कुछ महीने पहले रक्षा मंत्रालय को मिला था. रक्षा मंत्रालय से मंज़ूरी मिलने के बाद, प्रस्ताव को सुरक्षा पर कैबिनेट समिति द्वारा अंतिम मंज़ूरी देनी होगी.”
खास बात यह है कि भारत राफेल डील के साथ आगे बढ़ रहा है, जबकि संयुक्त राज्य अमेरिका और रूस दोनों ने IAF को अपने पांचवीं पीढ़ी के फाइटर विमान, F-35 और Su-57 की पेशकश की है.
हालांकि, विमान में स्वदेशी सामग्री वर्तमान में लगभग 30 प्रतिशत है, जो मेक इन इंडिया मानदंडों के तहत सामान्य 50-60 प्रतिशत की आवश्यकता से कम है.
सूत्रों ने संकेत दिया कि मेड-इन-इंडिया राफेल फाइटर में स्वदेशी सामग्री आखिरकार 60 प्रतिशत से ज़्यादा हो सकती है. इस प्रस्ताव को आगे बढ़ाने का कदम ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के खिलाफ राफेल के कथित मजबूत प्रदर्शन की पृष्ठभूमि में आया है, जहां कहा जाता है कि इस विमान ने अपने स्पेक्ट्रा इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सूट का इस्तेमाल करके चीनी PL-15 हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलों का सफलतापूर्वक मुकाबला किया था.
बड़े पैकेज के हिस्से के रूप में फ्रांस हैदराबाद में राफेल जेट में इस्तेमाल होने वाले M-88 इंजनों के लिए एक मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल (MRO) सुविधा स्थापित करने की भी योजना बना रहा है. डसॉल्ट ने पहले ही भारत में फ्रांसीसी मूल के लड़ाकू विमानों के रखरखाव के लिए एक इकाई स्थापित कर ली है, और टाटा सहित भारतीय एयरोस्पेस फर्मों से मैन्युफैक्चरिंग और सपोर्ट में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की उम्मीद है.
लड़ाकू जेट शामिल करने की प्रक्रिया को तेज करने का भारत का प्रयास बढ़ती क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों के बीच आया है. IAF की भविष्य की फोर्स संरचना Su-30 MKI फ्लीट, राफेल और स्वदेशी लड़ाकू कार्यक्रमों के इर्द-गिर्द केंद्रित होने की उम्मीद है. भारत पहले ही 180 LCA तेजस मार्क 1A विमानों के लिए ऑर्डर दे चुका है और 2035 के बाद अपने स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों को बड़ी संख्या में शामिल करने की योजना बना रहा है.
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