डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए रेसिप्रोकल टैरिफ पर अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर कोई फैसला नहीं सुनाया है. दूसरी बार सुनवाई टलने से कानूनी और आर्थिक अनिश्चितता बनी हुई है. यह मामला राष्ट्रपति की आपातकालीन शक्तियों और कांग्रेस के अधिकारों से जुड़ा है. न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक आज सुप्रीम कोर्ट तय करेगी कि क्या राष्ट्रपति अकेले IEEPA के तहत इतने बड़े और लंबे समय तक चलने वाले टैरिफ लगा सकता है या इसके लिए अमेरिकी संसद की मंजूरी जरूरी है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट राष्ट्रपति ट्रम्प के टैरिफ लगाने के अधिकार पर फैसला फिलहाल टाल दिया है। इस मामले की अगली सुनवाई कब होगी फिलहाल इसकी जानकारी नहीं आई है।

इससे पहले 9 जनवरी को कोर्ट ने मामले पर फैसला टाल दिया था. अब इस केस पर फैसला कब आएगा, कोर्ट की तरफ से फिलहाल कुछ स्पष्ट नहीं किया गया है. इससे पहले ट्रम्प ने बुधवार को कहा कि अगर सुप्रीम कोर्ट ने उनके लगाए गए ग्लोबल टैरिफ को रद्द किया, तो अमेरिका के लिए हालात पूरी तरह बिगड़ सकते हैं। इससे देश को टैरिफ से आए अरबों डॉलर लौटाने पड़ सकते हैं।

दरअसल, अप्रैल 2025 में ट्रम्प ने राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए दुनिया के कई देशों से आने वाले सामान पर भारी टैरिफ यानी आयात शुल्क लगा दिए थे। टैरिफ का मतलब होता है कि किसी देश से आने वाले सामान पर ज्यादा टैक्स लगाया जाए, ताकि वह महंगा हो जाए और घरेलू कंपनियों को फायदा मिले। ट्रम्प का दावा है कि इन टैरिफ्स से अमेरिका को 600 अरब डॉलर से ज्यादा राजस्व मिला है। ट्रम्प के मुताबिक, यह पैसा अमेरिकी अर्थव्यवस्था को मजबूत करता है और देश को विदेशी निर्भरता से बचाता है, इसलिए इसे राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़कर देखना सही है।

अब इसी फैसले को चुनौती दी गई है और इस पर सुप्रीम कोर्ट फैसला सुनाने वाली है। अदालत यह तय करेगी कि राष्ट्रपति ने जो टैरिफ लगाए, क्या उनके पास ऐसा करने का कानूनी अधिकार था या नहीं।

इस पूरे विवाद के केंद्र में एक कानून है, जिसका नाम इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) है। यह कानून 1977 में बनाया गया था। इसका मकसद यह था कि अगर देश पर कोई गंभीर खतरा जैसे युद्ध जैसी स्थिति, विदेशी दुश्मन से बड़ा आर्थिक खतरा या असाधारण अंतरराष्ट्रीय संकट आए तो राष्ट्रपति को कुछ खास शक्तियां दी जा सकें।

इन शक्तियों के तहत राष्ट्रपति विदेशी लेन-देन पर रोक लगा सकता है, उन्हें नियंत्रित कर सकता है या कुछ आर्थिक फैसले तुरंत लागू कर सकता है। ट्रम्प ने टैरिफ लगाने के लिए IEEPA का ही सहारा लिया था।

अगर कोर्ट यह मान लेती है कि IEEPA के तहत इतने बड़े टैरिफ लगाना राष्ट्रपति के अधिकार में नहीं आता, तो ट्रम्प के फैसले रद्द हो सकते हैं और भविष्य में किसी भी राष्ट्रपति की आपातकालीन आर्थिक शक्तियां सीमित हो जाएंगी। कोर्ट ने कहा कि ट्रम्प 150 दिनों तक 15% टैरिफ लगा सकते हैं, लेकिन इसके लिए ठोस कारण चाहिए। फैसले में कहा गया कि IEEPA में ‘टैरिफ’ शब्द का कहीं जिक्र नहीं है और न ही इसमें राष्ट्रपति के अधिकारों पर कोई स्पष्ट सीमा तय की गई है।

इससे पहले निचली फेडरल अदालतें ट्रंप सरकार के कई टैरिफ को अवैध करार दे चुकी हैं, जिसके बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा. नवंबर 2025 में हुई मौखिक सुनवाई के दौरान संकेत मिले थे कि रूढ़िवादी और उदारवादी दोनों तरह के जज राष्ट्रपति की आपातकालीन शक्तियों की इस एक्सप्लेनेशन को लेकर संशय में हैं.

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