पॉलिटिकल कंसल्टेंसी फर्म I-PAC के कार्यालय और सह-संस्थापक प्रतीक जैन के आवास पर छापेमारी से जुड़े मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट की ओर से ममता सरकार को बड़ा झटका लगा है. कोर्ट की ओर से ममता सरकार की ओर से ईडी के खिलाफ दर्ज FIR पर रोक लगा दी है. इसके साथ ही कोर्ट ने ममता सरकार और पश्चिम बंगाल के डीजीपी को नोटिस जारी कर दो हफ्ते मेन जवाब माँगा हैं. अदालत ने साफ कहा है कि, एजेंसी के काम में दखल नहीं दे सकते हैं. साथ ही कोर्ट ने छापेमारी के दौरान के CCTV फुटेज को सुरक्षित रखने का भी आदेश दिया है.
डीजीपी को हटाने जांच एजेंसी ने लगाई याचिका
ईडी ने नई याचिका में आरोप लगाया कि इन अधिकारियों ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ मिलकर जांच में बाधा डाली और सबूतों की कथित तौर पर चोरी में मदद की. ईडी ने अपनी नई अर्जी में केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) और कार्मिक व प्रशिक्षण विभाग (DOPT), भारत सरकार को निर्देश देने की मांग की है कि संबंधित अधिकारियों को निलंबित किया जाए. याचिका में यह भी जिक्र किया गया है कि डीजीपी राजीव कुमार पूर्व में कोलकाता पुलिस कमिश्नर के पद पर रहते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ धरने पर बैठे थे.
सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को ईडी की एक अन्य याचिका पर सुनवाई भी होगी, जिसमें आरोप लगाया गया है कि आई-पैक के कार्यालय और इसके सह-संस्थापक प्रतीक जैन के घर पर की गई छापेमारी और तलाशी अभियान में पश्चिम बंगाल सरकार और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बाधा डाली. जस्टिस प्रशांत कुमार शर्मा और विपुल एम. पंचोली की बेंच इस मामले की सुनवाई करेगी.
इस मामले में तुरंत न्यायिक हस्तक्षेप की मांग करते हुए ईडी ने दावा किया है कि उसके अधिकारियों को तलाशी अभियान के दौरान विरोध का सामना करना पड़ा और उन्हें कानून के अनुसार अपने कर्तव्यों का पालन करने से रोका गया. एजेंसी ने यह भी दावा किया कि पश्चिम बंगाल के अधिकारियों के हस्तक्षेप से उसकी जांच की निष्पक्षता से समझौता हुआ. हालांकि, पश्चिम बंगाल सरकार भी सुप्रीम कोर्ट पहुंची है, जहां उसने एक कैविएट दायर की. बंगाल सरकार ने अनुरोध किया कि उसका पक्ष सुने बिना कोई आदेश पारित न किया जाए.
‘अगर ऐसी घटनाओं को बर्दाश्त किया गया तो…’
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट में कहा कि, अगर ऐसी घटनाओं को बर्दाश्त किया गया तो इससे ऐसे कृत्यों को बढ़ावा मिलेगा और केंद्रीय बलों का मनोबल टूटेगा. राज्य सरकार को यह संदेश नहीं जाना चाहिए कि वे जबरन घुसकर चोरी करें और फिर धरने पर बैठ जाएं. एक मिसाल कायम की जानी चाहिए और जो अधिकारी मौके पर थे, उन्हें निलंबित किया जाना चाहिए. जस्टिस मिश्रा ने पूछा कि क्या हम इन अधिकारियों को सस्पेंड कर दें? इस पर मेहता ने कहा कि कोर्ट खुद सस्पेंड न करे, लेकिन सक्षम अधिकारियों को कार्रवाई करने का निर्देश दे. कोर्ट इस पूरे मामले को गंभीरता से ले. उन्होंने पीएमएलए की धारा 54 का जिक्र किया, जिसके तहत जांच में दखल देने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई हो सकती है.
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