रायपुर। “धान का कटोरा” छत्तीसगढ़ की मिट्टी, मौसम और किसान तीनों ने मिलकर कृषि को सिर्फ़ आजीविका नहीं बल्कि जीवन-दर्शन बना दिया हैं. आज भी प्रदेश की लगभग 70 प्रतिशत आबादी प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से कृषि पर निर्भर है. कृषि-आधारित छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, धान खरीदी व्यवस्था. वर्ष 2025 का धान खरीदी महापर्व एक प्रशासनिक प्रक्रिया के अलावा किसान सम्मान, पारदर्शिता, तकनीक और संवेदनशील शासन का प्रतीक बनकर सामने आया है. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि किसान सिर्फ योजना का लाभार्थी नहीं बल्कि विकास का साझेदार भी है.
साय सरकार ने बदली सोच, सुधारी व्यवस्था
धान खरीदी से जुड़ी चुनौतियाँ पिछले वर्ष में भी सामने आती रही जैसे लंबी कतारें, टोकन और तौल में देरी, सर्वर डाउन की समस्या, भुगतान में विलंब, बारदाने की कमी, परिवहन और उठाव में सुस्ती, कर्मचारियों का अभाव. इन सबका सीधा असर किसान की आर्थिक स्थिति और मानसिकता पर पड़ता था.मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में सरकार ने धान खरीदी को कृषक सेवा के रूप में देखा और परिणाम यह हुआ कि वर्ष 2025 में नीति-निर्माण से लेकर ज़मीनी क्रियान्वयन तक स्पष्टता, तत्परता और जवाबदेही दिखाई देती रही.

डिजिटल टोकन व्यवस्था से हुआ किसानों के समय का सम्मान
धान खरीदी महापर्व 2025 में संशोधित डिजिटल टोकन प्रणाली लागू की गई जिसमें किसानों ने घर बैठे मोबाइल या सेवा केंद्र से टोकन प्राप्त किया. धान ख़रीदी की तिथि और समय स्पष्ट होने से वहाँ होने वाले भीड़ और अव्यवस्था में उल्लेखनीय कमी आई. इसके साथ ही धान खरीदी महापर्व 2025 में बुजुर्ग और दूरदराज़ के किसानों को विशेष राहत दी गई, यह तमाम व्यवस्था दर्शाती है कि साय सरकार किसान के समय और श्रम—दोनों का सम्मान करने वाली सरकार है.
खरीदी केंद्र बनाए गए ‘किसान सुविधा केंद्र
धान खरीदी महापर्व 2025 में खरीदी केंद्र केवल तौल स्थल नहीं रहे बल्कि सम्पूर्ण किसान सुविधा केंद्र के रूप में विकसित किए गए. इन केंद्रों में बैठने की समुचित व्यवस्था, स्वच्छ पेयजल, प्राथमिक चिकित्सा, महिला किसानों के लिए अलग सहायता डेस्क,छाया, टेंट और स्वच्छता की यह व्यवस्थाएँ सरकार की मानवीय दृष्टि और संवेदनशील शासन का प्रमाण बनीं.
तौल और भुगतान में पारदर्शिता बनी किसानों के बीच भरोसे की मजबूत नींव
धान खरीदी महापर्व 2025 में इलेक्ट्रॉनिक कांटों के व्यापक उपयोग से तौल प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी बनी. तौल के तुरंत बाद रसीद दी गई, किसी भी प्रकार की कटौती पर सख्त रोक लगाई गई और DBT के माध्यम से किसानों को सीधा भुगतान किया गया. DBT के माध्यम से भुगतान में अधिकांश किसानों को 3 से 5 दिनों के भीतर भुगतान प्राप्त हुआ क्योंकि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की यह स्पष्ट हिदायत रही थी कि “किसान का पैसा रोका जाना, उसके पसीने का अपमान है.”

बारदाना, भंडारण और उठाव की उल्लेखनीय तैयारी
धान खरीदी महापर्व 2025 से पहले बारदाने की कमी एक बड़ी समस्या रहती थी, वहीं 2025 में बारदाने की पूर्व-व्यवस्था की गई, गोदाम की क्षमता में वृद्धि की गई.अस्थायी भंडारण केंद्र की व्यवस्था बनाई गई और उठाव एजेंसियों की संख्या में बढ़ोतरी की गई छत्तीसगढ़ के साय सरकार के इन कदमों से खरीदी प्रक्रिया और अधिक सुचारु बनी. धान खरीदी महापर्व 2025 में परिवहन और उठाव में तकनीक का भरपूर उपयोग किया गया . धान खरीदी महापर्व 2025 से पहले धान खरीदी के बाद उठाव सबसे बड़ी चुनौती होती थी. प्रदेश की साय सरकार ने ट्रांसपोर्टरों से बेहतर समन्वय बनाया और इस समस्या के समाधान के लिए GPS आधारित मॉनिटरिंग की गई उठाव के लिए मिलर्स की जवाबदेही तय की गई और विलंब पर दंडात्मक प्रावधान रखा गया शासन के इन प्रयासों से खरीदी केंद्रों पर जाम की स्थिति निर्मित नही हो पाई. सुचारु व्यवस्था के लिए मुख्यमंत्री के निर्देश स्पष्ट रहे कि किसानों से सीधा संवाद बनाए रखा जाय, उनसे सम्बंधित सभी हेल्पलाइन सक्रिय रखे जाएँ और फील्ड में अधिकारियों की नियमित उपस्थिति हो.
छोटे, सीमांत और महिला किसानों को विशेष राहत
धान खरीदी 2025 की सबसे बड़ी विशेषता समावेशी दृष्टिकोण रही.कम मात्रा में धान लेकर आने वाले किसानों के लिए अलग काउंटर बनाई गई, प्राथमिकता के आधार पर तौल किया गया और भुगतान में कोई भेदभाव न करते हुए
महिला किसानों के लिए पंजीयन प्रक्रिया सरल की गई और स्वयं सहायता समूहों की भागीदारी बढ़ाई गई यह महिला सशक्तिकरण की दिशा में छत्तीसगढ़ शासन का एक और सशक्त कदम रहा.
सख्त निगरानी के साथ अवैध गतिविधियों पर किया करारा प्रहार
समर्थन मूल्य पर धान खरीदी को निष्पक्ष बनाने के लिए बलरामपुर, जशपुर, सक्ती और जांजगीर-चांपा समेत राज्य भर में हुई सख्त कार्यवाहियों के तहत 30,490 क्विंटल से अधिक अवैध धान की ज़ब्ती की गई, 86 से अधिक वाहन जब्त किए गए .यह कार्यवाहियों प्रदेश सरकार का संदेश स्पष्ट है कि बिचौलियों और कोचियों के लिए छत्तीसगढ़ में कोई जगह नहीं.

धान भंडारण में सूखत प्रतिशतता रही सबसे कम
धान भंडारण में सूखत हमेशा से एक बड़ी समस्या रही है. धान खरीदी 2025 में नमी में कमी से होने वाली इस स्वाभाविक प्रक्रिया की प्रतिशतता में कमी देखी गई. वर्ष 2019-20 में 6.32% वर्ष 2020-21 में 4.17% और वर्ष 2024-25 में सूखत की यही प्रतिशतता सबसे कम अनुमानित: 3.49% ही रही. संक्षेप में कहा जा सकता है कि अब सूखत डेटा-आधारित, ट्रैक-योग्य और निगरानी में है.जहाँ असामान्य कमी पाई गई. सूखत की समस्या पर अंकुश लगाने के लिए नोटिस,जांच, निलंबन और FIR तक की कार्रवाई की गई यह राज्य सरकार के शून्य सहनशीलता नीति का प्रमाण है.
धान खरीदी में रचा इतिहास
13 जनवरी 2026 तक 17.77 लाख किसानों ने 105.14 लाख मीट्रिक टन धान समर्थन मूल्य पर बेचा जिसके लिए छत्तीसगढ़ की साय सरकार ने 23,448 करोड़ रुपए का भुगतान किया. प्रदेश के इतिहास में यह अब तक का सर्वाधिक खरीदी और सर्वाधिक भुगतान रहा है. यह उपलब्धि साय सरकार की पारदर्शी और किसान-हितैषी नीतियों को प्रमाणित करने वाली है.धान खरीदी महापर्व 2025 ने यह प्रमाणित कर दिया कि जब नेतृत्व संवेदनशील, नीतियाँ स्पष्ट और प्रशासन जवाबदेह हो तो सरकारी व्यवस्था आशा और विश्वास बन जाती है.

प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के कुशल नेतृत्व में धान खरीदी केवल अनाज की खरीद नहीं बल्कि किसान के आत्मसम्मान की सुरक्षा का माध्यम भी बनी. धान खरीदी 2025 का यह मॉडल आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ को कृषि-आधारित समृद्धि की ओर और तेज़ी से ले जाने वाला साबित होगा.


