US-Iran Tension: 10 बार ईरान पर हमले की धमकी देने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने अपने कदम पीछे खींच लिए हैं। सऊदी अरब, कतर और ओमान की कूटनीतिक कोशिशों के चलते अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर संभावित हमला टाल दिया है। सऊदी अरब, कतर और ओमान ने अंतिम समय में हस्तक्षेप कर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ईरान पर हमला न करने के लिए मना लिया, जिससे मध्य पूर्व में एक बड़े सैन्य संकट को टलने में मदद मिली है। खाड़ी देशों के अधिकारियों ने गुरुवार को कहा कि इन तीन देशों ने ट्रंप को समझाने के लिए ‘आखिरी वक्त में कड़ा संघर्ष’ किया, जिससे ईरान को अपनी नेक नीयत दिखाने का एक मौका मिल सके।

बता दें कि सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई (Ali Khamenei) को सत्ता से बेदखल करने के लिए ईरान में पिछले 20 दिन से प्रदर्शन हो रहा है। हिंसा और सरकार की कार्रवाई में अबतक 3 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। प्रदर्शनाकियों को समर्थन देते हुए ट्रंप ने हमले की धमकी ईरान को दी थी। । ईरान पर दबाव बढ़ाने के लिए अमेरिकी नौसेना का युद्धपोत USS अब्राहम लिंकन (USS Abraham Lincoln) कैरियर को रवाना किया था। हालांकि अब सऊदी अरब-कतर और ओमान ने ट्रंप को हमला नहीं करने के लिए मना लिया है।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी अरब के एक सीनियर अधिकारी ने बताया कि ट्रंप को यह समझाया गया कि ईरान पर हमला पूरे खित्ते में ‘विनाशकारी परिणामों’ (Grave blowbacks) का रास्ता खोल देगा। अधिकारी ने इस कूटनीतिक मिशन को ‘बमों को डिफ्यूज करने वाली एक अनिद्रा भरी रात’ करार दिया। खाड़ी देशों ने न सिर्फ वॉशिंगटन से बात की, बल्कि ईरान को भी कड़ा संदेश भेजा कि अगर उसने खाड़ी में अमेरिकी ठिकानों पर हमला किया, तो क्षेत्रीय देशों के साथ उसके संबंध हमेशा के लिए बिगड़ जाएंगे।

अल-उदेद एयरबेस पर फिर लौटी हलचल

तनाव के चरम पर होने के दौरान कतर स्थित मिडिल ईस्ट के सबसे बड़े अमेरिकी सैन्य अड्डे ‘अल-उदेद’ पर सिक्योरिटी लेवल को बढ़ा दिया गया था और कुछ कर्मियों को वहां से हटने के निर्देश दिए गए थे। हालंकि कूटनीतिक बातचीत सफल होने के बाद, बुधवार शाम से ही स्थिति सामान्य होने लगी। राजनयिक सूत्रों के मुताबिक, अब सैन्य विमान और कर्मी वापस अपनी पुरानी पोजीशन पर लौट रहे हैं और सुरक्षा अलर्ट के स्तर को घटा दिया गया है।

ट्रंप का बदला रुख…

लगातार धमकियों के बाद डोनाल्ड ट्रंप के सुर अचानक बदल गए। उन्होंने कहा कि उन्हें ‘दूसरी तरफ के बहुत महत्वपूर्ण सूत्रों’ से यह आश्वासन मिला है कि ईरान प्रदर्शनकारियों को मौत की सजा नहीं देगा। इस आश्वासन के बाद अमेरिका ने फिलहाल सैन्य विकल्प को ठंडे बस्ते में डाल दिया है। हालांकि, सऊदी अधिकारियों का कहना है कि भरोसे को मजबूत करने के लिए संवाद अभी भी जारी है, जिससे आने वाले वक्त में ऐसी स्थिति फिर से न बने।

800 लोगों को दी जाने वाली थी फांसी

पाकिस्तान में ईरान के राजदूत रजा अमीरी मोघदम ने कहा कि ईरान में लोगों को विरोध प्रदर्शन करने का वैध अधिकार है। ईरानी सरकार ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत भी की है। मोघदम ने आरोप लगाया कि ईरान में हिंसा के पीछे सशस्त्र समूह शामिल हैं, जिन पर हत्याओं और मस्जिदों पर हमलों के आरोप हैं। इस हमले के बाद हजारों लोगों को गिरफ्तार किया गया, जिसकी संख्या 10000 से ऊपर बताई जा रही है> वहीं इनमें से कई लोगों को फांसी की भी सजा देने का ऐलान किया गया था। बुधवार तक अमेरिका धमकी दे रहा था कि अगर ईरान ने प्रदर्शनों के सिलसिले में गिरफ्तार लोगों को मौत की सजा दी, तो वह सैन्य कार्रवाई करेगा। व्हाइट हाउस की प्रवक्ता कैरोलीना लेविट ने कहा कि ईरान में 800 लोगों को फांसी दी जाने वाली थी।

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