प्रमोद निर्मल, मोहला-मानपुर। जिले के अंबागढ़ चौकी में केंद्र सरकार के मार्फत संचालित शासकीय एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय में हफ्तेभर के दरमियान एक के बाद एक दो नाबालिग छात्राएं फिनाइल पीकर आत्महत्या का प्रयास कर चुकी हैं। बीते गुरुवार को एक नाबालिग छात्रा ने फिनायल का सेवन कर खुद को खत्म करने की कोशिश की थी। उक्त छात्रा अभी मेडिकल कॉलेज से इलाज कराकर अपने घर लौटी ही थी कि एक और नाबालिग छात्रा ने बुधवार को आवासीय विद्यालय में फिनायल पीकर आत्मघाती कदम उठा लिया। गंंभीर हालत में उन्हें राजनांदगांव मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया है, जहां इलाज जारी है।
अपर कलेक्टर ने दोनों घटनाओं की पुष्टि करते हुए बताया कि मामले की जांच की जा रही है। बहरहाल उक्त आवासीय विद्यालय के संबंधित प्राचार्य व हॉस्टल वार्डन को हटा दिया गया है। हालांकि इस बेहद संवेदनशील मामले में बड़ा सवाल ये खड़ा हो गया है कि क्या प्रिंसिपल और वार्डन को हटाकर जवाबदेही की इतिश्री कर लेना काफी है ? और उससे भी बड़ा सवाल ये उठ रहा है कि आदिवासी शिक्षा के उत्थान के लिए संचालित एकलव्य आवासीय विद्यालय में ऐसी कौन सी यातनाएं आदिवासी बालाएं झेल रही हैं कि ये बालाएं आत्मघाती कदम उठाने को मजबूर हो रही हैं ?
आखिरकार जिले की कलेक्टर इस गंभीर मसले पर कुछ भी कहने से क्यों बच रही हैं ? और सबसे बड़ा सवाल ये कि कानूनी तौर पर अपराधिक प्रकरण के रूप में सामने आए इस संवेदनशील मसले पर कानूनी शिकंजा क्यों नहीं कसा जा रहा और जिम्मेदार विद्यालय स्टॉफ पर कड़ी प्रशासनिक कार्यवाही क्यों नहीं हो रही है ? आखिरकार ये एक ऐसा संवेदनशील मसला है, जिसमें एक नाबालिक छात्रा की बमुश्किल जान बची है। वहीं एक अन्य छात्रा की जान अभी भी अस्पताल में बचने की जुगत में लगी हुई है।


ये है पूरा मामला
पूरा मामला मानपुर-मोहला जिले के अंबागढ़ चौकी में संचालित एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय का है। अंबागढ़ चौकी स्थित एक परिसर में मोहला, मानपुर सहित अंबागढ़ चौकी के तीन अलग-अलग एकलव्य विद्यालय एक साथ संयुक्त रूप से संचालित है। इस आवासीय विद्यालय में बीते गुरुवार को एक नाबालिग छात्रा ने फिनायल का सेवन कर लिया, जिसे आनन-फानन में विद्यालय स्टॉफ उसे अंबागढ़ चौकी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले गया। स्थिति गंभीर होने के चलते अंबागढ़ चौकी अस्पताल से उक्त छात्रा को फौरन रेफर कर बेहतर उपचार के लिए राजनांदगांव मेडिकल कॉलेज भेजा गया, जहां से इलाज के बाद स्वस्थ होकर उक्त छात्रा घर लौट चुकी है।
हैरानी के साथ गहन जांच योग्य बात ये है कि इस घटना के बाद हफ़्तेभर के भीतर बीते बुधवार को इसी विद्यालय में एक अन्य नाबालिग छात्रा ने फिनायल पीकर खुद को खत्म करने का आत्मघाती कदम उठा लिया। पूर्व की भांति स्टॉफ ने इस बार भी आनन फानन में इस छात्रा को भी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अंबागढ़ चौकी पहुंचाया, जहां से इस छात्रा को भी गंभीर अवस्था में राजनांदगांव मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। बहरहाल आत्महत्या का प्रयास करने वाली ये दूसरी छात्रा राजनांदगांव मेडिकल कॉलेज में भर्ती है, जहां इलाज जारी है। जिला पंचायत अध्यक्ष नम्रता सिंह ने परिजनों से मुलाकात कर छात्राओं का हालचाल जाना।
कमजोर प्रशासनिक व्यवस्था से विद्यालय प्रबंधन बेलगाम
एक के बाद एक दो छात्राओं का आवासीय विद्यालय में आत्महत्या का प्रयास की घटना ने जिले की कमजोर प्रशासनिक व्यवस्था और विद्यालय प्रशासन की लापरवाही, मनमानी की कलई खोल दी है। पूर्व में भी उक्त आवासीय विद्यालय में कथित तौर पर कई बड़ी लापरवाही और बदइंतजामी सामने आ चुकी है। बावजूद इसके आदिमजाति कल्याण विभाग और जिला प्रशासन ने एकलव्य विद्यालय संचालन में कसावट लाने मे दिलचस्पी नहीं दिखाई। नतीजा सामने है, जिले की कमजोर प्रशासनिक व्यवस्था व जिला प्रशासन की उदासीनता के चलते विद्यालय प्रबंधन बेलगाम हो गई। और बेलगाम विद्यालय प्रबंधन विद्यालय व छात्रवास में छात्र-छात्राओं के बीच जारी विरोधाभाषी घटनाक्रमों पर लापरवाह बना रहा। नतीजतन दो छात्राओं ने आत्महत्या का रुख अपनाया।
आदिवासी समाज ने सामाजिक स्तर पर जांच की मांगी अनुमति
हफ्तेभर के भीतर सामने आए इस घटनाक्रम से विद्यालय में अध्ययनरत बच्चों के पालक चिंतित हैं। शुक्रवार को पालक इस मसले पर अहम बैठक करने वाले हैं। इस बैठक का नतीजा क्या निकलता है ये देखना दिलचस्प होगा। वहीं दूसरी ओर आदिवासी समाज ने भी कलेक्टर के पास लिखित दरखास्त लगाई है कि विद्यालय में पहुंचकर सामाजिक स्तर पर समाज जनों को जांच पड़ताल की अनुमति दी जाए। हालांकि अनुमति मिली या नहीं ये फिलहाल स्पष्ट नहीं है।
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