Kalpvas Niyam: क्या होता है कल्पवास? माघ मेले में कौन-कौन कर सकता है इसे

माघ के पवित्र महीने में माघ मेले के दौरान विशेषकर प्रयागराज के संगम तट पर कल्पवास की परंपरा सदियों से चली आ रही है

यह केवल नदी किनारे रहना नहीं है बल्कि सांसारिक मोह-माया को त्यागकर एक महीने तक सादगी और कठिन नियमों का पालन करते हुए ईश्वर की शरण में रहने का नाम है

कल्पवास माघ मेले के दौरान गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम तट पर एक महीने तक निवास करने की प्रक्रिया है

यह पौष मास की पूर्णिमा से शुरू होकर माघ की पूर्णिमा तक चलता है

इस दौरान श्रद्धालु अपना घर-बार छोड़कर नदी के किनारे छोटी सी कुटिया या तंबू में रहते हैं

कल्पवास का मुख्य उद्देश्य मन और इंद्रियों पर विजय पाना है

कल्पवास कोई भी व्यक्ति कर सकता है जिसकी ईश्वर में अटूट श्रद्धा हो और जो कठिन नियमों का पालन करने की शारीरिक क्षमता रखता हो

मुख्य रूप से गृहस्थ लोग अपनी जिम्मेदारियों से कुछ समय के लिए विराम लेकर आत्मिक शांति के लिए कल्पवास करते हैं

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