सोहराब आलम/मोतिहारी। पूर्वी चंपारण के कैथवलिया स्थित विराट रामायण मंदिर परिसर में विश्व के सबसे ऊंचे शिवलिंग की स्थापना शनिवार को विधि-विधान के साथ की गई। शुक्रवार को कड़े सुरक्षा इंतजामों के बीच 33 फीट ऊंचे शिवलिंग को मंदिर परिसर में बनाए गए आधार पीठ के ठीक ऊपर खड़ा कर दिया गया। इसके साथ ही सहस्त्रलिंगम को आधार पीठ पर स्थापित करने की प्रक्रिया भी पूरी कर ली गई है।

तमिलनाडु में दस वर्षो में हुआ निर्माण

यह विशाल शिवलिंग तमिलनाडु के महाबलीपुरम स्थित पट्टीकाडू गांव में पिछले दस वर्षों में तैयार किया गया है। ब्लैक ग्रेनाइट के एक ही मोनोलिथ पत्थर से निर्मित इस शिवलिंग का वजन लगभग 210 मीट्रिक टन है। कलाकारों की कड़ी मेहनत से तैयार इस शिवलिंग पर 1008 सहस्त्रलिंगम उकेरे गए हैं।

शिल्पकार हेमलता देवी की रही विशेष भूमिका

शिवलिंग के निर्माण की पूरी प्रक्रिया प्रसिद्ध शिल्पकार हेमलता देवी की देखरेख में संपन्न हुई। उनके साथ शिल्पकारों की एक पूरी टीम ने कार्य किया, जिसमें उनके पुत्र विनायक बैकट रमण की भी अहम भूमिका रही। पीठ पूजा के अवसर पर सभी शिल्पकारों को आमंत्रित किया गया है और मंदिर निर्माण समिति की ओर से उनका सम्मान किया जाएगा।

46 दिनों में तय की 2565 किलोमीटर की यात्रा

विश्व के सबसे बड़े शिवलिंग को तमिलनाडु के महाबलीपुरम से विराट रामायण मंदिर परिसर तक लाने में कुल 46 दिन लगे। 21 नवंबर को शुरू हुई यात्रा तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश होते हुए लगभग 2565 किलोमीटर की दूरी तय कर 05 जनवरी 2026 को कैथवलिया पहुंची।

शिवलिंग दर्शन को उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

शिवलिंग के पहुंचने के बाद से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। शुक्रवार को जब शिवलिंग को आधार पीठ पर खड़ा किया जा रहा था, उस दौरान दूर-दूर से आए भक्त हर-हर महादेव के जयकारे लगाते नजर आए। पूरा क्षेत्र भक्तिमय माहौल में डूबा रहा।