Bastar News Update : बीजापुर. जिले में नगर पालिका की कार्रवाई ने उन परिवारों को बेघर कर दिया, जो कभी नक्सल हिंसा से बचने के लिए गांव छोड़कर शहर आए थे। नया बस स्टैंड के पीछे चट्टानपारा इलाके में 55 मकानों पर बुलडोजर चला। इनमें डीआरजी जवानों और नक्सल पीड़ित परिवारों के घर भी शामिल थे। परिवारों का कहना है कि गांव लौटना जानलेवा है, और शहर में अब कोई ठौर नहीं बचा। महिलाओं और बच्चों की आंखों में डर और असहायता साफ दिखी। एक महिला ने बताया कि पति ऑपरेशन पर हैं और बच्चे भूखे बैठे हैं। प्रशासन का दावा है कि दो वर्षों से लगातार नोटिस दिए जा रहे थे। 22 दिसंबर को अंतिम नोटिस के बाद कार्रवाई की चेतावनी दी गई थी। अब दूसरे चरण में शांतिनगर के 20 मकानों पर भी कार्रवाई प्रस्तावित है। सवाल यह है कि सुरक्षा में साथ देने वालों के पुनर्वास की जिम्मेदारी किसकी है क्या अतिक्रमण हटाने के साथ मानवीय विकल्प भी जरूरी नहीं?


दंतेवाड़ा – घुन लगा चावल , गोदाम से आश्रम तक खतरा
दंतेवाड़ा जिले में सरकारी गोदामों से निकल रहे चावल ने खाद्य सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। चितालंका वेयरहाउस से घुन लगा चावल आश्रमों और पीडीएस दुकानों के लिए भेजा जा रहा था। जांच में सामने आया कि यह जनवरी 2025 का पुराना स्टॉक है। इसी स्टॉक के 540 पैकेट पहले गीदम वेयरहाउस भेजे जा चुके हैं। वेयरहाउस की क्षमता से कई गुना ज्यादा चावल दबाव में रखा गया। कर्मचारियों का आरोप है कि राइस मिलर और क्वालिटी इंस्पेक्टर की मिलीभगत है। हैरानी की बात यह कि दोनों गोदामों का क्वालिटी इंस्पेक्टर एक ही है। 40–50 हजार क्विंटल स्टॉक होने से रखरखाव प्रभावित हो रहा है। इस लापरवाही का असर सीधे बच्चों और गरीबों की थाली पर पड़ रहा है। अब जरूरत है जवाबदेही तय करने और पूरे स्टॉक की स्वतंत्र जांच की।
जगदलपुर – पॉलीथिन पर सख्ती , पर्यावरण का संदेश
नगर निगम जगदलपुर ने प्रतिबंधित पॉलीथिन के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है। ज्योति प्लास्टिक प्रतिष्ठान से 1017 किलो पॉलीथिन जब्त की गई। इसकी कीमत करीब ढाई लाख रुपये आंकी गई है। दुकान संचालक पर 30 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया। यह कार्रवाई पर्यावरण संरक्षण अभियान के तहत की गई। निगम ने साफ किया कि आगे भी अभियान जारी रहेगा। शहीद पार्क के सामने ठेला संचालकों पर भी कार्रवाई हुई। गंदगी फैलाने पर कुल 7 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया। नालियों में कचरा फेंकने पर सख्त चेतावनी दी गई। निगम ने नागरिकों से पॉलीथिन बेचने वालों की सूचना देने की अपील की। स्वच्छ शहर की जिम्मेदारी अब सिर्फ निगम नहीं, नागरिकों की भी है।
कोंडागांव – श्रमदान से बना पुल आत्मनिर्भर गांव की मिसाल
कोंडागांव जिले के एक छोटे से गांव ने विकास की नई कहानी लिखी है। बारिश में रास्ता बंद होने से बच्चे स्कूल और श्रद्धालु मंदिर नहीं जा पाते थे। हर साल की परेशानी से तंग आकर गांव ने खुद समाधान चुना। ग्रामीणों ने श्रमदान से लकड़ी का बेली ब्रिज तैयार किया। इस पुल से अब बरसात में भी आवाजाही संभव हो गई है। बच्चे बिना डर स्कूल पहुंच रहे हैं और मंदिर तक रास्ता खुला है। ग्राम पटेल ज्ञान सिंह ठाकुर ने बताया कि गांव खुद देखरेख करता है। शिल्पकार दयाराम साहू ने पुल का डिजाइन तैयार किया। यह पुल सिर्फ रास्ता नहीं, आत्मनिर्भरता की पहचान है। गांव की यह पहल आसपास के इलाकों के लिए प्रेरणा बन गई है।
दंतेवाड़ा – स्मार्ट क्लास या सप्लाई घोटाला?
दंतेवाड़ा के गदापाल प्राथमिक आश्रम में शिक्षा से ज्यादा अनियमितता दिख रही है। जहां बच्चों के बैठने को बेंच नहीं, वहां 11 लाख के कंप्यूटर खरीदे गए। 10 कंप्यूटर और एक प्रोजेक्टर एक दिन भी उपयोग में नहीं आए। कंप्यूटर कक्ष धूल और कपड़े से ढंका पड़ा है। 79 बच्चों के लिए केवल एक शिक्षक नियुक्त है। कंप्यूटर पढ़ाने के लिए प्रशिक्षित स्टाफ ही नहीं है। खरीदी टेंडर की बजाय कोटेशन से की गई। घटिया गुणवत्ता के कंप्यूटर जल्दी खराब हो गए। तीन महीने पहले भी विभागीय अनियमितताओं में अधिकारी जेल जा चुके हैं। फिर भी बच्चों की बुनियादी जरूरतों की अनदेखी जारी है।
सुकमा – सर्जन का इस्तीफा ,स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल
सुकमा जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था को बड़ा झटका लगा है। जिला अस्पताल के मुख्य सर्जन डॉ. अनामय बिडवई ने इस्तीफा दे दिया। वे जिले के एकमात्र सर्जन थे। अब सर्जरी सेवाएं लगभग ठप होने की स्थिति में हैं। डॉ. बिडवई अब तक 2700 से अधिक जटिल सर्जरी कर चुके थे। दवाइयों और उपकरणों की भारी कमी लंबे समय से बनी हुई थी। मांग पत्र समय पर न भेजने से आपूर्ति बाधित रही। हालात इतने खराब थे कि कपड़े से ऑपरेशन का दबाव बनाया गया। गायनिक ऑपरेशन भी लगभग बंद हो चुके थे। मरीजों को मजबूरी में जगदलपुर और रायपुर रेफर किया जा रहा है। यह इस्तीफा सिस्टम की विफलता का आईना बन गया है।
बीजापुर – पोकलेन में आग, अंधेरे में असुरक्षा
बीजापुर के पुराना मार्केट इलाके में देर रात पोकलेन में आगजनी की घटना हुई। घटना के समय चालक मशीन में ही सो रहा था। मजदूरों की सतर्कता से बड़ा हादसा टल गया। प्राथमिक जांच में पेट्रोल डालकर आग लगाने की बात सामने आई है। पोकलेन बिजली विभाग के कार्य में लगी थी। आशंका है कि लेन-देन विवाद में घटना को अंजाम दिया गया। इलाके में देर रात असामाजिक तत्वों की आवाजाही रहती है।स्थानीय लोग गश्त बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं।
नारायणपुर – घर वापसी की घोषणा पर सुलझा अंतिम संस्कार विवाद
नारायणपुर जिले के ग्राम बोरपाल में अंतिम संस्कार को लेकर तनाव फैल गया था। ईसाई रीति से दफन की तैयारी पर ग्रामीणों ने विरोध जताया। मामला आदिवासी परंपरा और पंचम अनुसूची से जुड़ा था। प्रशासन और पुलिस ने मौके पर पहुंचकर संवाद शुरू किया। समाज प्रमुखों और बुजुर्गों ने संयम से बात रखी। अंततः मृतक के परिवार ने घर वापसी की घोषणा की। देवस्थल में पूजा के बाद परिवार को समाज में शामिल किया गया। विवाद शांतिपूर्ण ढंग से समाप्त हो गया। यह घटना संवाद और सामाजिक समरसता की मिसाल बनी। ग्रामीणों ने परंपरा और संविधान दोनों को सर्वोपरि बताया।
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