चंडीगढ़। आने वाले बजट सत्र में पेश हो रहे बीज एक्ट- 2025 का पंजाब ने विरोध किया है। आज केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मिलकर मुख्यमंत्री भगवंत मान ने यह विरोध जताया और कहा कि पंजाब को विश्वास में लेने के लिए यह बिल कैसे लाया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि नए बीज एक्ट में निजी कंपनियां तय करेंगी कि कौन सा बीज लगाना है कौन सा नहीं.. जबकि हमारे यहां परंपरा रही है कि हम जो फसल लगाते हैं उसी में से कुछ हिस्सा अगले साल लगाए जाने वाली फसल लगाने के लिए स्टोर कर लेते हैं।

ऐसे में कोई कंपनी यह तय नहीं कर सकती कि हम कौन सा बीज लगाएं या न लगाएं। मुख्यमंत्री ने बैठक के बाद कहा कि यह बीज एक्ट संसद में नहीं आना चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा कि गृह मंत्री ने हमें भरोसा दिया कि वह इस संबंधी मंत्रालय से बात करेंगे।

‘छोटे किसानों और पारंपरिक प्रणालियों के खिलाफ’

गौरतलब है कि केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित बीज विधेयक 2025 किसानों और कृषि संगठन ने विरोध जताया है। यह बिल मौजूदा भारतीय बीज अधिनियम, 1966 और बीज (नियंत्रण) आदेश, 1983 को बदलने के इरादे से तैयार किया गया है, लेकिन विरोधियों का कहना है कि इसके प्राविधान छोटे किसानों और पारंपरिक बीज प्रणालियों के खिलाफ हैं।

नया बीज विधेयक में दावा किया गया है कि बाज़ार में गुणवत्ता वाले बीजों की उपलब्धता सुनिश्चित करना इस नए विधेयक का मुख्य उद्देश्य है। यह घटिया या नकली बीजों की बिक्री पर रोक लगाएगा।

इसके तहत सभी बीज किस्मों का अनिवार्य पंजीकरण और वीसीयू (वेल्यू फार कल्टीवेशन एंड यूज ) परीक्षण लागू होगा तथा प्रत्येक बीज पैक पर QR कोड के माध्यम से ट्रेसबिलिटी सुनिश्चित की जाएगी। साथ ही, दोषी उत्पादकों पर ₹30 लाख तक का जुर्माना और तीन साल तक की सजा जैसे सख्त दंड शामिल किए गए हैं।

‘यह विधेयक कॉर्पोरेट हितों को देगा बढ़ावा’

विरोध करने वाले संगठनों की मुख्य चिंता यह है कि पंजीकरण और वीसीयू जांच जैसी प्रक्रियाएं बड़ी कॉर्पोरेट कंपनियों को ही लाभ देंगी, जबकि छोटे किसानों और अनौपचारिक बीज संरक्षित समूहों पर बोझ बढ़ाएंगी। विधेयक में किसानों के लिए आसान क्षतिपूर्ति (कम्पेंसशन) तंत्र नहीं है। यदि किसी खराब या उपयुक्त बीज से फसल खराब होती है।

तो कंपनियों पर तो जुर्माना लगाने का प्राविधान है लेकिन किसानों के नुकसान की आपूर्ति कैसे होगी? प्रभावित किसानों को न्यायालयों का रुख करना पड़ेगा, जो समय भी खर्च करवाएंगा और महंगा भी पड़ेगा। इसीलिए किसानों को लगता है कि यह विधेयक कॉर्पोरेट हितों को बढ़ावा देगा और स्थानीय बीज विविधता को नुकसान पहुंचाएगा।

केंद्र सरकार ने पंजाब सहित सभी राज्यों को यह बिल भेजकर उन सुझाव मांगे थे। पता चला है कि पंजाब ने लिखित में भी अपना विरोध दर्ज करवा दिया है साथ ही आज मुख्यमंत्री ने केंद्रीय गृह मंत्री के सामने भी यह मामला रख दिया है।

मान ने एसवाईएल का मुद्दा भी उठाया

मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि केंद्रीय गृह मंत्री के पास उन्होंने एसवाईएल का मुद्दा भी उठाया और कहा कि हमारे पास किसी भी राज्य को देने के लिए एक बूंद भी पानी नहीं है इसलिए इस मुद्दे को बैठकर हल कर लिया जाए, अब यह खत्म होना चाहिए।

भगवंत मान ने पंजाब के गोदामों में भारी मात्रा में पड़े चावल को दूसरे राज्य में मूव करने का मुद्दा उठाया और कहा कि आने वाले अप्रैल महीने में अगर जगह खाली नहीं हुई तो गेहूं का भंडारण करना मुश्किल होगा।

इसके साथ ही उन्होंने आढ़तियों के रोके हुए कमीशन का मुद्दा उठाते हुए कहा कि वे आढ़ती यूनियनों के साथ बैठक कर लें ताकि उनका समाधान हो सके।मुख्यमंत्री ने यूटी चंडीगढ़ में पंजाब और हरियाणा के कर्मचारियों और अफसरों का 60:40 का अनुपात बनाया जाए । उन्होंने कहा कि एफसीआई के पंजाब रीजन सहित इस अनुपात को मेंटेंन न करने से पंजाब के लोगों में रोष है।

शाह बोले- गंभीरता से लेंगे मुद्दा

मुख्यमंत्री ने देहाती विकास फंड का 8500 करोड़ रुपए का बकाया देने का मुद्दा और कहा कि हमने ग्रामीण सड़कें बनानी हैं ताकि मंडियों में अनाज लाया जा सके। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि अमित शाह ने भरोसा दिया कि वह इसे प्राथमिकता पर लेंगे और अफसरों के साथ बैठक करके जल्द ही इसकी पहली किश्त जारी करवाएंगे। मान ने कहा कि यह हमारे राज्य का हक है , हम भीख नहीं मांग रहे।

पाकिस्तान के साथ लगती सीमा पर लगी कंटीली तार का मुद्दा भी मुख्यमंत्री ने उठाया और कहा कि कंटीली तार को सीमा के साथ दो सौ मीटर करने से हजारों एकड़ जमीन बच सकती है और किसानों को इस जमीन पर खेती करने के लिए परेशानी भी नहीं होगी। जबकि इस समय बीएसएफ के जवान उनके साथ खेती करवाने के लिए जाते हैं।