दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने 35 छात्रों के हक में अहम फैसला सुनाते हुए कहा है कि एक निजी स्कूल ने इन बच्चों से गैरकानूनी तरीके से महीनों तक फीस वसूली। कोर्ट ने इसे गंभीर मामला मानते हुए स्कूल को निर्देश दिया कि वह इन छात्रों के दूसरे स्कूल में दाखिले का पूरा खर्च वहन करे। हाईकोर्ट ने साफ कहा कि निजी स्कूल को हर छात्र के दाखिले की रसीद के अनुसार राशि का भुगतान करना होगा। अदालत का मानना है कि स्कूल की मनमानी का खामियाजा बच्चों और उनके अभिभावकों को नहीं भुगतना चाहिए।
जस्टिस जसमीत सिंह की बेंच ने अपने आदेश में साफ कहा है कि 11वीं कक्षा के इन छात्रों के भविष्य को किसी भी हाल में प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा। कोर्ट ने निर्देश दिया कि इन छात्रों को न केवल दूसरे स्कूल में तत्काल दाखिला दिया जाए, बल्कि केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) भी इन छात्रों की सूची अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर जारी करे। अदालत ने कहा कि ऐसा करना इसलिए जरूरी है ताकि इन छात्रों के आने वाले दो साल बर्बाद होने से बचाए जा सकें। कोर्ट ने मामले को छात्रों के शैक्षणिक भविष्य से जुड़ा गंभीर विषय बताते हुए त्वरित कार्रवाई पर जोर दिया।
रिचमंड ग्लोबल स्कूल से जुड़ा है मामला
यह मामला पश्चिमी विहार स्थित रिचमंड ग्लोबल स्कूल से जुड़ा है। सीबीएसई ने इस स्कूल की 9वीं से 12वीं कक्षा तक की मान्यता अप्रैल 2025 में रद्द कर दी थी, लेकिन स्कूल प्रबंधन ने यह जानकारी छात्रों और अभिभावकों से छिपाए रखी। इसके बावजूद स्कूल ने दिसंबर 2025 तक सभी छात्रों से फीस वसूली। इतना ही नहीं, 10वीं और 12वीं कक्षा के छात्रों से सीबीएसई को जमा की जाने वाली परीक्षा फीस भी ली गई। दिसंबर 2025 के आखिरी सप्ताह में छात्रों को स्कूल की सीबीएसई मान्यता रद्द होने की जानकारी दी गई, जिसके बाद प्रभावित छात्रों और उनके अभिभावकों ने दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया।
छात्रों की ओर से पेश हुए वकील अशोक अग्रवाल ने बताया कि दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के तहत इस स्कूल के 12वीं कक्षा के छात्रों को पहले ही बोर्ड परीक्षा में बैठने की अनुमति मिल चुकी है। हालांकि, असली चिंता 11वीं कक्षा के छात्रों के भविष्य को लेकर थी। उन्होंने बताया कि यदि ये छात्र 11वीं की परीक्षा नहीं दे पाते, तो वे अगले शैक्षणिक सत्र में 12वीं कक्षा में प्रवेश नहीं कर पाते, जिससे उनका पूरा शैक्षणिक वर्ष बर्बाद हो सकता था। हाईकोर्ट के ताजा आदेश से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से करीब 75 छात्रों को लाभ मिला है।
अग्रवाल ने यह भी बताया कि दिल्ली हाईकोर्ट ने 15 मई 2025 को ही निजी स्कूल को निर्देश दिया था कि वह छात्रों को यह जानकारी दे कि सीबीएसई ने स्कूल की मान्यता रद्द कर दी है। इसके बावजूद स्कूल ने छात्रों से फीस वसूलना जारी रखा।
वसूली गई फीस लौटाने पर होगी सुनवाई
दिल्ली हाईकोर्ट की बेंच ने गैरकानूनी तरीके से नौ महीने तक अभिभावकों से फीस वसूलने वाले निजी स्कूल को लेकर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा है कि फीस वापसी (रिफंड) के मुद्दे पर अगली तारीख पर विचार किया जाएगा। कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 23 जनवरी की तारीख तय की है। इस बीच, दिल्ली सरकार की ओर से अदालत को बताया गया है कि शैक्षणिक सत्र के अंतिम चरण में वह इन प्रभावित छात्रों को पश्चिमी जिले के सरकारी स्कूलों में दाखिला देने के लिए तैयार है, ताकि किसी भी छात्र का शैक्षणिक भविष्य प्रभावित न हो।
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