अजयारविंद नामदेव, शहडोल। मां नर्मदा के उद्गम स्थल अमरकंटक में आस्था सिर्फ पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है। यहां श्रद्धालु अपने सपनों के घर की नींव भी मंदिर परिसर में रखे पत्थरों से गढ़ते हैं। मान्यता है कि जितनी ऊंची पत्थरों की मंजिल, उतना बड़ा और भव्य मकान मां नर्मदा की कृपा से मिलता है।

शहडोल संभाग के अनूपपुर जिले में स्थित पवित्र नगरी अमरकंटक आस्था और रहस्य का अनोखा केंद्र है। नर्मदा मंदिर परिसर में रखे छोटे-बड़े पत्थरों को श्रद्धालु एक के ऊपर एक सजाकर मंजिलनुमा ढेर बनाते हैं। देश-विदेश से आए भक्त यहां साधारण घर से लेकर आलीशान बंगले और महल जैसी हवेली की कामना करते नजर आते हैं।

श्रद्धालुओं का विश्वास है कि पत्थरों का संतुलन बना रहना मनोकामना पूरी होने का संकेत है, जबकि गिरना बाधा का। वर्षों पुरानी यह परंपरा आज भी लोगों के विश्वास को मजबूती देती है। अमरकंटक में ये पत्थर केवल पत्थर नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं के सपनों की सीढ़ी बन चुके हैं।

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