मणिपुर में मई 2023 में भड़की जातीय हिंसा के दौरान सामूहिक दुष्कर्म की शिकार बनी कुकी समुदाय की एक युवती की अब मौत हो गई है। परिजनों का कहना है कि वह उस भयावह घटना के बाद कभी मानसिक और शारीरिक रूप से उबर नहीं पाई। गहरे सदमे और गंभीर चोटों ने उसकी सेहत पर ऐसा असर डाला कि आखिरकार उसने दम तोड़ दिया। परिवार के मुताबिक, युवती को दुष्कर्म के बाद गंभीर शारीरिक चोटें आई थीं और वह लगातार मानसिक तनाव में रहती थी। इलाज के बावजूद उसकी हालत में सुधार नहीं हुआ। कुकी समुदाय के संगठन इंडिजिनस ट्राइबल लीडर्स फोरम (आईटीएलएफ) ने बताया कि युवती को इलाज के लिए गुवाहाटी ले जाया गया था, जहां 10 जनवरी 2026 को उसकी मौत हो गई।

मई 2023 में कुकी महिला का इंफाल से अपहरण

मई 2023 में हिंसा भड़कते ही कुछ लोगों के समूह ने इस 20 साल की महिला को इंफाल से अगवा कर लिया। एफआईआर में दर्ज बयान के अनुसार, चार हथियारबंद काली शर्ट पहने व्यक्ति उसे एक पहाड़ी क्षेत्र में ले गए, जहां तीन ने बारी-बारी से उसके साथ दुष्कर्म किया। कुकी संगठनों का आरोप है कि मीरा पाइबी के कुछ सदस्यों ने उसे मैतेई पुरुषों के हवाले किया। ख़बरों से पता चला अरामबाई तेंगगोल जैसे मैतेई समूह काली शर्ट पहनते हैं।

जुलाई 2023 में एनडीटीवी से बातचीत में पीड़िता ने बताया था, ‘मुझे चार लोग एक सफेद बोलेरो में ले गए और जब वे मुझे ले जा रहे थे, तो ड्राइवर को छोड़कर उनमें से तीन ने मेरे साथ दुष्कर्म किया। फिर मुझे एक पहाड़ी पर ले जाया गया जहां उन्होंने मेरे साथ मारपीट की। उसने आगे कहा, ‘वे मेरे साथ जो भी बुरी चीजे कर सकते थे उन्होंने कीं और पूरी रात मुझे कुछ भी खाने को नहीं दिया गया। उन्होंने पानी भी नहीं दिया। सुबह, किसी तरह, वॉशरूम जाने के बहाने… मैंने आंखों पर बंधी पट्टी हटाई और आसपास देखने की कोशिश की कि क्या हो रहा है। उसके बाद मैंने पहाड़ी से नीचे भागने और बचने का फैसला किया।’

इलाज के दौरान मौत

गंभीर चोटों के साथ वह किसी तरह बच निकली। सब्जियों के ढेर के नीचे छिपकर एक ऑटो-रिक्शा ड्राइवर की मदद से कांगपोकपी पहुंची, जहां से उसे कोहिमा के अस्पताल में भेजा गया। दो महीने बाद 21 जुलाई को पुलिस में शिकायत दर्ज हुई, जब राज्य में कानून-व्यवस्था पूरी तरह बिगड़ चुकी थी। चुराचांदपुर के इंडिजिनस ट्राइबल लीडर्स फोरम (आईटीएलएफ) ने बयान जारी कर कहा कि उसे लैंगगोल ले जाकर बलात्कार किया गया और बिष्णुपुर में मरने के लिए छोड़ दिया गया। आईटीएलएफ ने कहा, ‘हालांकि वह बच गई, लेकिन उसे गंभीर शारीरिक चोटें, गहरा सदमा लगा और गर्भाशय से जुड़ी गंभीर समस्याएं हुईं। उसका गुवाहाटी में इलाज चल रहा था, लेकिन दुख की बात है कि 10 जनवरी, 2026 को चोटों के कारण उसकी मौत हो गई।’

परिवार में शोक

पीड़िता की मां ने न्यूजलॉन्ड्री से बातचीत में बताया कि चोटों से सांस लेने में तकलीफ होने लगी थी। मां ने कहा, ‘इस भयानक क्रूरता का शिकार होने से उनकी मेरी बेटी मिलनसार लड़की थी। उसे पढ़ाई में ज्यादा दिलचस्पी नहीं थी, लेकिन वह इंफाल में हमारे एक रिश्तेदार के साथ एक ब्यूटी पार्लर में काम करती थी। उसके बहुत सारे दोस्त थे और वह अक्सर उनके साथ घूमती थी। मेरी बेटी हमेशा मुस्कुराती रहती थी और ज़िंदगी से भरपूर थी, लेकिन इस घटना के बाद उसकी मुस्कान चली गई।’

हिंसा की आग में मणिपुर

मणिपुर में भूमि अधिकार और राजनीतिक प्रतिनिधित्व जैसे मुद्दों पर भड़की यह हिंसा अब तक 260 से अधिक लोगों की जान ले चुकी है, जबकि 50,000 लोग विस्थापित हो चुके हैं। आईटीएलएफ ने महिला की स्मृति में कैंडल मार्च का एलान किया है।

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