इमेट एक्टिविस्ट और इनोवेटर सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंगमो ने कहा कि जोधपुर जेल में तीन महीने से ज्यादा समय तक एकांत कारावास में रहने के बावजूद वे आशावादी बने हुए हैं। उन्होंने आगे बताया कि वांगचुक अपने कारावास के समय का इस्तेमाल अपने जेल के अनुभवों पर आधारित एक किताब लिखने में कर रहे हैं।

पीटीआई को दिए एक इंटरव्यू में आंगमो ने कहा कि जेल में रहने के बावजूद वांगचुक का मनोबल कम नहीं हुआ है, भले ही उनकी परिस्थितियां बेहद दयनीय और बेहद कठिन हैं। उन्होंने बताया कि वह जो किताब लिख रहे हैं, उसका टाइटल ‘फॉरएवर पॉजिटिव’ होगा। आंगमो ने कहा, “सकारात्मक और आशावादी लोगों की एक अच्छी बात यह है कि वे हर चीज को सहजता से स्वीकार कर लेते हैं। लेकिन जिस स्थिति में वह रह रहे हैं, वह बहुत ही दयनीय और कठिन है।”

जाने-माने क्लाइमेट एक्टिविस्ट 110 दिनों से ज्यादा समय से जेल में हैं। लद्दाख को राज्य का दर्जा देने और छठी अनुसूची में शामिल करने से संबंधित मांगों को लेकर 15 दिन का उपवास खत्म करने के बाद उन्हें 26 सितंबर को गिरफ्तार किया गया था। उनकी गिरफ्तारी लेह में हुई हिंसा के बाद हुई। इस हिंसा में चार लोगों की मौत हुई थी।

वांगचुक की चीटियों में भी दिलचस्पी- आंगमो

आंगमो ने कहा कि उन्हें चींटियों में भी दिलचस्पी पैदा हो गई है। उन्होंने कहा, “अगर वह कुछ चींटियों और उनके व्यवहार का अवलोकन करता है, तो वह मुझसे चींटियों के व्यवहार पर किताबें लाने के लिए कहता है क्योंकि चींटी समुदाय में बहुत एकजुटता और टीम भावना होती है।” उनके अनुसार, वांगचुक एक बैरक के फर्श पर कंबल ओढ़कर सोते हैं, जहां कोई फर्नीचर नहीं है और चलने-फिरने की जगह भी बहुत कम है। उनके पास फोन, टीवी या घड़ियां नहीं हैं। यहां तक कि उनके परिवार द्वारा लाए गए अखबारों में भी उनसे या लद्दाख से संबंधित खबरें काट दी जाती हैं।

आंगमों ने कहा, “जब वह अखबार में उन खबरों की कटिंग देखता है, तो उसे पता चल जाता है कि उस दिन उसकी तस्वीर उसमें जरूर छपी होगी, या फिर वह खबर लद्दाख के बारे में ही रही होगी।” इन प्रतिबंधों के बावजूद, वांगचुक ने अपने दिन को पढ़ने, ध्यान और व्यायाम करने पर ज्यादा फोकस किया है। वांगचुक की पत्नी ने कहा, “वह हर चीज का भरपूर फायदा उठाते हैं और इसलिए उसने जेल में अपने जीवन को अपनी प्रगति का साधन बना लिया है।”

वह कम में भी खुश रहते हैं- सोनम वांगचुक की पत्नी

आंगमो ने कहा कि दो महीने बाद ही वांगचुक ने अपने परिवार को बैरक में बुनियादी सुविधाओं की कमी के बारे में बताया था। उन्होंने कहा, “पहले दो महीनों तक हमने एक-दूसरे से अपनी समस्याओं के बारे में बात नहीं की। हमने मजबूत होने का दिखावा किया।” उनकी सेहत के बारे में आंगमो ने कहा कि वे संतुष्ट और मानसिक रूप से मजबूत हैं। उन्होंने कहा, “वे आम तौर पर बहुत आशावादी और सकारात्मक सोच वाले व्यक्ति हैं, जो हर चीज में सकारात्मक पहलू देखते हैं। वे कम में भी खुश रहते हैं।”

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