केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बिना नाम लिए पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान और चीन पर निशाना साधते हुए कहा कि हमारा पड़ोसी जरा सिरफिरा है, कब क्या हरकत कर दे कुछ कहा नहीं जा सकता है। न जाने कब हमें हथियारों की जरूरत पड़ जाए। इसलिए डिफेंस सेक्टर में हमें आत्मनिर्भर बनन पड़ेगा। रक्षा मंत्री ने नागपुर में यह बात कही। वे आज इकोनॉमिक्स एक्सप्लोसिव कंपनी के दौरे पर पहुंचे थे।
डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग प्राइवेट सेक्टर पर क्या बोले राजनाथ?
रक्षा मंत्री ने कहा कि डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में प्राइवेट सेक्टर की भूमिका कम से कम 50% तो होनी भी चाहिए, हमने निश्चय किया है कि हमारे प्लेटफार्म सिस्टम, सब सिस्टम धीरे-धीरे स्वदेशी बनाएंगे, यह कहा नही जा सकता कि हथियारों की आवश्यकता कब पड़ जाए, हमारा पड़ोसी जरा सिरफिरा है, कब क्या हरकत कर दे कुछ कहा नहीं जा सकता।
इस दौरान रक्षा मंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि डिफेंस सेक्टर को हम लोग आत्मनिर्भर बनाना चाहते हैं, प्रधानमंत्री बार-बार इसका आग्रह कर रहे हैं. एक समय था कि पूरा का पूरा डिफेंस सेक्टर पब्लिक सेक्टर तक सीमित था, प्राइवेट सेक्टर के बारे में तो कोई सोच भी नहीं सकता था, प्राइवेट सेक्टर की पोटेंशियल पर हमको पूरा भरोसा था, विश्वास था, हर जगह फोक्स्ड डेवलपमेंट की धारा बह रही है, शिक्षक से लेकर तकनीक तक हर क्षेत्र में प्राइवेट सेक्टर अहम भूमिका निभा रहा है।
डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग में प्राइवेट सेक्टर की भूमिका कितनी होनी चाहिए?
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि, प्राइवेट सेक्टर की भूमिका आने वाले समय में और तेजी से बढ़ने चाहिए और भारत में बढ़ रही है। हमारी सरकार का ध्यान आने वाले समय में डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में प्राइवेट सेक्टर की भूमिका कम से कम 50% तो होनी भी चाहिए। हमने निश्चय किया है कि हमारे प्लेटफार्म सिस्टम, सब सिस्टम धीरे-धीरे स्वदेशी बनाएंगे, पिछले 10 वर्ष में डिफेंस सेक्टर में, आत्मनिर्भरता की दिशा में, जो मेहनत की है, जो प्रयास किया है, उसका परिणाम यह है कि हमारा डोमेस्टिक डिफेंस प्रोडक्शन 2014 में 46000 करोड़ के आसपास था, आज वह डेढ़ लाख करोड़ से अधिक पहुंच गया है। इतनी जल्दी, प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी का परिणाम है कि भारत का डिफेंस एक्सपोर्ट है 10 वर्ष पहले सिर्फ 1000 करोड़ के आसपास था, वह बढ़कर लगभग 25000 करोड़ से ज्यादा हो गया है, हमने लक्ष्य रखा है कि 2030 तक यह 50000 करोड़ तक हो जाए।
भारत हथियारों के उत्पादन का ग्लोबल हब बने
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आगे कहा कि हमारा लक्ष्य है कि भारत हथियारों के उत्पादन का ग्लोबल हब बने। उन्होंने कहा 88 घंटे तक ऑपरेशन चला, लेकिन वह 88 घंटे यह शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता, इसको शब्दों में बताना मुश्किल है, ऐसा ऑपरेशन में हर मिनट हर फैसला का महत्व होता है, जब ऑपरेशन इतना इंटेंस होते हैं ,तो उसकी तैयारी भी इतनी व्यापक उतनी मजबूत होनी चाहिए।
वार का नेचर तेजी से बदल रहा है
उन्होंने कहा-‘आज हम यदि हम चारों नजर देख डालें तो तरह-तरह युद्ध दिखाई दे रहे हैं, कुछ संघर्ष से जो कई वर्षों से चल रहे हैं, रूस यूक्रेन, कुछ महीनों से चल रहा है और कुछ ऐसे भी जो कुछ घंटे तक ही चले हैं ,ऐसे कई युद्ध हुए हैं चल भी रहे हैं और कुछ ऐसे भी एक जो बीच-बीच में रुकते हैं फिर युद्ध होने लगते हैं। किसी प्रकार के युद्ध को उसके तरीके को ,उसके स्वरूप को देख लीजिए यह स्पष्ट रूप से समझ में आती है, उसकी इंटेंसिटी भी बढ़ती जा रही है, उसकी तैयारी युद्ध स्तर पर होनी चाहिए, युद्ध स्वभाव, वार का नेचर तेजी से बदल रहा है।
रक्षा मंत्री ने आगे कहा कि नागास्त्र के और भी आधुनिक वर्जन अब विकसित किया जा चुके हैं और मुझे पूरा विश्वास है कि भविष्य में इसकी आवश्यकता पड़ने पर शत्रुओं के लिए काफी घातक सिद्ध होगा। यह कहा नहीं जा सकता कि हथियारों की आवश्यकता कब पड़ जाए, हमारा पड़ोसी जरा सिरफिरा है, कब क्या हरकत कर दे कुछ कहा नहीं जा सकता।
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