वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरीना मचाडो ने 15 जनवरी को अपना नोबेल शांति पुरस्कार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को गिफ्ट कर दिया था. मचाडो ट्रंप से मिलने व्हाइट हाउस पहुंची थी. इस घटना पर नोबेल फाउंडेशन ने कड़ा रुख अपनाया है. फाउंडेशन ने साफ शब्दों में कहा है कि नोबेल पुरस्कार को किसी और के नाम ट्रांसफर नहीं किया जा सकता, न ही प्रतीकात्मक रूप से.

नोबेल फाउंडेशन ने बताया कि उसका सबसे बड़ा काम नोबेल पुरस्कारों की गरिमा बनाए रखना और अल्फ्रेड नोबेल की वसीयत का पालन करना है. वसीयत में साफ लिखा है कि यह पुरस्कार उन्हें दिया जाता है, जिन्होंने मानवता के लिए सबसे बड़ा योगदान दिया हो. साथ ही यह भी तय किया गया है कि कौन-सी संस्था किस नोबेल पुरस्कार को देने का अधिकार रखती है. इसी कारण, एक बार दिया गया नोबेल पुरस्कार किसी और को सौंपा नहीं जा सकता.

नोबेल पुरस्कार में क्या मिलता है?

नोबेल शांति पुरस्कार पाने वाले व्यक्ति को तीन मुख्य चीजें मिलती हैं. सोने का मेडल, एक डिप्लोमा और पुरस्कार की राशि. फाउंडेशन ने स्पष्ट किया कि इन तीनों चीजों का भविष्य में चाहे जो भी हो, लेकिन इतिहास में असल नोबेल विजेता वही व्यक्ति रहता है, जिसे आधिकारिक तौर पर यह पुरस्कार दिया गया है. अगर कभी मेडल या डिप्लोमा किसी और के पास चला जाए, तब भी इससे यह नहीं बदलता कि नोबेल पुरस्कार किसे मिला था.

नोबेल फाउंडेशन ने यह भी साफ किया कि कोई भी नोबेल विजेता अपना पुरस्कार किसी और के साथ साझा नहीं कर सकता और न ही इसे ट्रांसफर कर सकता है. इस पूरे मामले पर नोबेल कमेटी ने कहा कि वह नोबेल विजेताओं की रोजमर्रा की राजनीति, उनके बयानों या बाद के फैसलों पर टिप्पणी नहीं करती.

नोबेल का मेडल कैसा होता है?

नोबेल शांति पुरस्कार का मेडल 18 कैरेट सोने का होता है. इसका वजन 196 ग्राम और आकार 6.6 सेंटीमीटर होता है. इसे साल 1901 में नॉर्वे के मूर्तिकार गुस्ताव विगेलैंड ने डिजाइन किया था. मेडल पर शांति और भाईचारे का संदेश लिखा होता है.

मेडल और रकम दान करने पर रोक नहीं

फाउंडेशन के नियमों में इस बात पर कोई रोक नहीं है कि विजेता अपने मेडल, डिप्लोमा या पुरस्कार की रकम का क्या करे. कोई विजेता इन्हें अपने पास रख सकता है, दान कर सकता है या बेच सकता है. दुनिया भर में कई नोबेल मेडल संग्रहालयों में रखे गए हैं.

संयुक्त राष्ट्र के पूर्व महासचिव कोफी अन्नान के परिवार ने उनका नोबेल मेडल और डिप्लोमा संयुक्त राष्ट्र कार्यालय को दान किया था. रूसी पत्रकार दिमित्री मुरातोव ने अपना नोबेल मेडल बेचकर मिली पूरी रकम यूक्रेन के शरणार्थी बच्चों के लिए दान कर दी. कुछ अन्य विजेताओं ने इलाज या शोध के लिए भी अपने मेडल बेचे हैं.

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