अजयारविंद नामदेव, शहडोल। मध्य प्रदेश के शहडोल में रेत का ठेका नहीं होने का फायदा उठाकर रेत माफिया पूरी तरह बेलगाम हो चुके हैं। सोन नदी का सीना छलनी कर उसे लहूलुहान कर रहे बेखौफ माफिया जिले से बाहर तक रेत की तस्करी कर रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि अब खनिज विभाग ने माफियाओं पर नकेल कसने के लिए तकनीक का सहारा लिया है। अवैध रेत उत्खनन न सिर्फ पर्यावरण के लिए खतरा है, बल्कि कानून व्यवस्था को भी खुली चुनौती है। अब Google Earth की निगरानी में खनिज विभाग ने कार्रवाई की कमान संभाल ली है।
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जिले में रेत का वैध ठेका नहीं होने का फायदा उठाकर रेत माफिया संगठित रूप से सक्रिय हो गए हैं। हालात यह हैं कि बेखौफ माफिया जिले की प्रमुख नदियों, खासकर सोन नदी का सीना छलनी कर अवैध रेत उत्खनन कर रहे हैं। खुलेआम रेत का उत्खनन कर ट्रकों और भारी वाहनों के जरिए जिले से बाहर रीवा, सतना सहित उत्तरप्रदेश तक तस्करी की जा रही है। लगातार हो रही इस अवैध गतिविधि से न सिर्फ पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंच रहा है, बल्कि प्रशासन की सख्ती को भी खुली चुनौती दी जा रही है।रेत माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हैं कि वे शासकीय अधिकारियों और कर्मचारियों पर हमला करने से भी नहीं चूक रहे। पूर्व में हुई घटनाओं के बाद खनिज विभाग और प्रशासन की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं सामने आई हैं।
रेत के अवैध कारोबार पर अंकुश लगाने के लिए खनिज विभाग ने अब तकनीक का सहारा लिया है।खनिज विभाग अब अपने कार्यालय से ही Google Earth की लाइव लोकेशन और सैटेलाइट इमेजरी के माध्यम से संदिग्ध क्षेत्रों पर नजर रख रहा है। जिन इलाकों में रेत उत्खनन और परिवहन की गतिविधियां दिखाई दे रही हैं, वहां तत्काल कार्रवाई की रणनीति बनाई जा रही है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि इस तकनीकी निगरानी से न केवल अवैध उत्खनन की पहचान होगी, बल्कि माफियाओं की गतिविधियों पर लगातार नजर भी रखी जा सकेगी।
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जिले के अंतिम छोर के इलाके जैसे देवलौंद, ब्यौहारी, जयसिंहनगर, गोहपारू, बुढार और अमलाई क्षेत्र इस समय रेत माफियाओं के प्रमुख ठिकाने बने हुए हैं। इन क्षेत्रों में सोन नदी से बड़े पैमाने पर रेत निकाली जा रही है और रात के अंधेरे में परिवहन किया जा रहा है। खनिज विभाग का दावा है कि तकनीकी निगरानी के जरिए जल्द ही अवैध रेत उत्खनन पर प्रभावी कार्रवाई की जाएगी, अब देखना यह होगा कि Google Earth की नजर से रेत माफियाओं पर कितना शिकंजा कस पाता है और सोन नदी को इस अवैध दोहन से कब राहत मिलती है।
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