माता पार्वती ने मणिकर्णिका घाट को क्यों दिया था श्राप, जहां 24 घंटे जलती हैं चिताएं

मणिकर्णिका घाट एक महत्वपूर्ण और प्रतिष्ठित घाट है, जो हिंदू धर्म के सबसे पवित्र श्मशान घाटों में से भी एक माना गया है

मणिकर्णिका घाट को मोक्षदायनी घाट और महाश्मशान के नाम से भी जाना जाता है

ऐसी मान्यता है कि अगर किसी व्यक्ति का अंतिम संस्कार इस घाट पर किया जाए, तो उसे जन्म और मृत्यु के चक्र से छुटकारा मिल जाता है

साथ ही यह घाट जीवन और मृत्यु के चक्र का प्रतीक भी है, जो जीवन की क्षणभंगुरता यानी नश्वरता की याद दिलाता रहता है

एक प्रचलित कथा के अनुसार, माता पार्वती ने मणिकर्णिका घाट को एक श्राप दिया था

एक बार माता पार्वता और भगवान शिव इस घाट पर स्नान के लिए पहुंचे

घाट पर स्नान करते समय माता पार्वती की कान की मणि यानी आभूषण कहीं गिर गया। शिव जी के बहुत ढूंढने के बाद भी वह नहीं मिली

इससे माता पार्वती बहुत क्रोधित हो गईं और उन्होंने घाट को यह श्राप दिया की यह घाट हमेशा जलता रहेगा

तभी से यह मान्यता चली आ रही है कि मणिकर्णिका घाट की अग्नि कभी शांत नहीं होती।