शिखिल ब्यौहार, भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार ने इंदौर में दूषित पानी से हुई कई मौतों के बाद बड़ा और क्रांतिकारी कदम उठाया है। अब पानी और सीवर लाइनों के लीकेज का पता लगाने के लिए रोबोट का इस्तेमाल किया जाएगा।

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नगरीय प्रशासन विभाग ने ‘अमृत रेखा’ नाम का एक स्पेशल पोर्टल और मोबाइल ऐप तैयार किया है। इस प्लेटफॉर्म पर पूरे राज्य के 413 नगरीय निकायों की वाटर सप्लाई और सीवेज लाइनों का पूरा नेटवर्क मैपिंग अपलोड किया जाएगा। इससे लीकेज, क्रॉसिंग पॉइंट्स और संभावित दूषित होने के जोखिमों का पहले से पता चल सकेगा।

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आधुनिक तकनीक जैसे GIS मैपिंग और रोबोटिक डिटेक्शन से पानी की गुणवत्ता सुनिश्चित की जाएगी। यह कदम इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई त्रासदी के बाद उठाया गया है, जहां कई लोगों की जान गई थी।

MP में 5,219 लीकेज चिह्नित

जारी आंकड़ों के अनुसार पूरे राज्य में कुल 5,219 पाइपलाइन लीक (रिसाव) का पता चला है। विभाग ने इसपर तुरंत काम किया और इनमें से 4,893 लीक को ठीक किया, जिससे पानी की बर्बादी रुकी और प्रदूषण का खतरा कम हुआ। इसके अलावा भूजल स्रोतों की शुद्धता की जांच के दौरान, 58 ट्यूबवेल में दूषित पानी पाया गया, इन्हें तुरंत सील कर दिया गया।

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