नोएडा के सेक्टर-150 में सिस्टम की लापरवाही ने सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की जान ले ली. पिता की आंखों के सामने 80 बचावकर्मी की मौजूदगी में युवराज पानी से भरी खाई में डूब गया, लेकिन ‘पानी ठंडा है’ कहकर कोई मदद को नहीं उतरा. सीएम योगी ने एक्शन लेते हुए नोएडा सीईओ को हटा दिया है और SIT जांच के आदेश दिए हैं. जानिए कैसे 2015 से अटके एक सरकारी प्रोजेक्ट और अथॉरिटी की सुस्ती ने एक होनहार युवक को मौत के मुंह में धकेल दिया. नोएडा में एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज की दर्दनाक मौत के चार दिन बाद भी प्रशासन उसकी कार को पानी से बाहर नहीं निकाल पाया है. रेस्क्यू ऑपरेशन की भारी खामियों और जिम्मेदार अधिकारियों की गैर-मौजूदगी ने जिला प्रशासन की कार्यशैली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं.

चश्मदीद ने बताया कि हादसा रात करीब 11:45 बजे हुआ था. युवराज पानी में डूबती कार के अंदर से करीब दो घंटे तक मदद के लिए चिल्लाता रहा. जब सिस्टम का कोई भी गोताखोर पानी में नहीं उतरा. तब एक स्थानीय शख्स ने हिम्मत दिखाई और अपनी कमर में रस्सी बांधकर 50 मीटर अंदर तक गया. युवराज का कोई सुराग नहीं मिला.

नोएडा में रहने वाले सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज की कार डूबने से हुई मौत के मामले में चार दिन बीत जाने के बावजूद प्रशासन वाहन को बरामद नहीं कर सका है. यह हादसा रात करीब 11:45 बजे हुआ था, जिसके बाद युवराज लगभग दो घंटे तक मदद के लिए पुकारता रहा. सूचना मिलने पर रात 00:06 बजे फायर ब्रिगेड को कॉल की गई और 00:25 बजे तीन गाड़ियां मौके पर पहुंचीं. रात भर चले रेस्क्यू के दौरान सुबह 3:30 से 4:00 बजे के बीच एसडीआरएफ की टीम पहुंची, लेकिन विजिबिलिटी जीरो होने के कारण सफलता नहीं मिली.

स्थानीय लोगों का आरोप है कि जहां डीएम को मौके पर रहकर रेस्क्यू का नेतृत्व करना चाहिए था, वहां सिर्फ एक एसडीएम खानापूर्ति के लिए पहुंचे थे. इस सुस्ती के कारण चार दिन बाद भी कार पानी के अंदर ही फंसी हुई है. हादसे वाली रात 00:06 बजे पहली कॉल हुई, जिसके 15-20 मिनट बाद नॉलेज पार्क से फायर की गाड़ी पहुंची. फायर विभाग ने तुरंत गोताखोरों और एसडीआरएफ को बुलाने की मांग की थी, लेकिन एसडीआरएफ की टीम तड़के 4 बजे के करीब पहुंची. सुबह 6 बजे तक चले इस शुरुआती रेस्क्यू ऑपरेशन का नतीजा शून्य रहा और युवराज को बचाया नहीं जा सका.

जिला मजिस्ट्रेट (DM) के हाथों में डिजास्टर मैनेजमेंट की कमान होती है, लेकिन नोएडा की डीएम मेधा रूपम चार दिनों में एक बार भी घटनास्थल पर नहीं पहुंचीं. हैरान करने वाली बात यह है कि प्रशासन की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान भी जारी नहीं किया गया है.

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