नोएडा। सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। मृत युवक अपनी जान बचाने के लिए दो घंटे तक पुलिस और सिस्टम से मदद की गुहार लगाता रहा लेकिन किसी ने उसकी मदद नहीं की। पुलिस प्रशासन के सारे हाईटेक हथियार धरे के धरे रह गए और एक पिता के सामने देखते ही देखते उसका बेटा मौत के गाल में समा गया। इस मालमे ने एक बार फिर सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए।

जिम्मेदार अफसरों की लापरवाही की जांच के बीच सिंचाई विभाग की एक चिट्ठी सामने आई है। जिसने नोएडा अथॉरिटी की कार्य प्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए है। यदि सिंचाई विभाग की सलाह को अमल में लाया गया होता तो शायद युवराज मेहता की जान बच जाती। विभाग ने नोएडा सेक्टर 150 के इस इलाके में 2023 में अतिरिक्त जल निकासी की आवश्यकता बताई थी। जिम्मेदार अफसरों ने इस परियोजना पर ध्यान नहीं दिया और अब एक बेगुनाह सिस्टम की बलि चढ़ गया।

सिंचाई विभाग के पत्र को किया इग्नोर

सिंचाई विभाग ने नोएडा प्राधिकारण को लिखे अपने पत्र में कहा था कि नोएडा सेक्टर 150 में जमा हुए बारिश के पानी के निकासी के लिए हेड रेगुलेटर बनाने की की आवश्यकता जताई थी लेकिन उस पर ध्यान नहीं दिया गया। जिसके चलते सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की कार पानी से भरे गड्ढे में गिरने से मौत हो गई थी। वहीं घटना के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले लोगों ने कहा कि प्रस्तावित हेड रेगुलेटर का निर्माण होने पर इस त्रासदी को टाला जा सकता था, क्योंकि जमा हुआ पानी घटनास्थल पर जमा होने के बजाय बह जाता।

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जांच के लिए एसआईटी का गठन

वहीं पुलिस ने इस मामले में दो रियल एस्टेट डेवलपर्स मेसर्स विशटाउन प्लानर्स और लोटस ग्रीन्स के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। योगी सरकार ने मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित करने का आदेश दिया है। एडीजी मेरठ जोन की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय एसआईटी गठित की गई। इसमें मंडलायुक्त मेरठ और लोक निर्माण विभाग के चीफ इंजीनियर को भी शामिल किया गया है। इंजीनियर के पिता राज कुमार मेहता ने स्थानीय अधिकारियों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए मामले में जवाबदेही तय करने की मांग की है।

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क्या है पूरा मामला

बता दें कि ग्रेटर नोएडा के सेक्टर-150 में एक कंस्ट्रक्शन साइट पर पानी से भरे गड्ढे में कार गिरने से 27 साल के सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत हो गई थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट कि माने तो युवराज की मौत दम घुटने के कारण हुई। उनके फेफड़ों में काफी मात्रा में पानी भरा हुआ था। वहीं मृतक के पिता ने बताया कि वहां मौजूद एथारिटी के कर्मचारियों के पास रस्सी के अलावा कुछ नहीं था, जो रस्सी नीचे फेंक रहे थे वह वहां पहुंच नहीं पा रही थी। वहीं, बेटा बार बार कह रहा था बहुत नीचे जा रही है कार अब भी बचा लीजिए। अगर समय से बोट आ जाती तो बेटे की जान बच जाती, बेटा 2 घंटे तक जान बचाने की गुहार लगाता रहा।