टुकेश्वर लोधी, आरंग। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘जल जीवन मिशन’ योजना आरंग के ग्राम पंचायत देवरी में भ्रष्टाचार और तकनीकी खामियों की शिकार होती नजर आ रही है. ग्रामीणों को घर-घर शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए 1 करोड़ 04 लाख 28 हजार रुपए की भारी-भरकम राशि स्वीकृत की गई थी, लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट है.

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घटिया निर्माण और देखरेख के अभाव में यह योजना दम तोड़ रही है. निर्माण कार्य पूरा होने का दावा तो किया गया है, लेकिन हकीकत यह है कि नवनिर्मित पानी टंकी से लगातार पानी का रिसाव (लीकेज) हो रहा है. पाइप लाइन विस्तार में भी भारी गड़बड़ी सामने आई है. पाइप जगह-जगह से फूट चुके हैं, जिससे लाखों लीटर कीमती पानी बर्बाद होकर गलियों पर बह रहा है. इसी खराबी के कारण पिछले 10 से 15 दिनों से गांव की जलापूर्ति पूरी तरह ठप है, जिससे ग्रामीण बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं.

योजना में सुरक्षा मानकों की भी जमकर धज्जियां उड़ाई गई हैं.पंप हाउस का निर्माण अब तक नहीं किया गया है, जिसके चलते बिजली के कनेक्शन खुले में पड़े हैं.टंकी परिसर की घेराबंदी (बाउंड्री वॉल) नहीं होने से वहां हर समय दुर्घटना का अंदेशा बना रहता है. विशेषकर बच्चों और मवेशियों के लिए यह क्षेत्र जानलेवा साबित हो सकता है.

प्रशासन का दावा ‘हर घर जल’ का है, लेकिन ग्राम देवरी के कई वार्डों और घरों तक पाइप लाइन पहुंची ही नहीं है. ग्राम पंचायत देवरी के सरपंच प्रतिनिधि टेकचंद साहू ने बताया कि शिकायत के बाद भी विभाग या ठेकेदार सुध लेने को तैयार नहीं हैं. करोड़ों रुपए खर्च होने के बाद भी हमें दूर से पानी ढोना पड़ रहा है. अगर जल्द सुधार नहीं हुआ तो हम ग्रामीण आंदोलन को मजबूर होंगे.

हैरानी की बात यह है कि निर्माण कार्य में इतनी खामियां हैं कि ठेकेदार और संबंधित विभाग ने अभी तक इसे ग्राम पंचायत देवरी को हैंडओवर नहीं किया है. तकनीकी रूप से कार्य अधूरा होने के बावजूद कागजों पर इसे कैसे दर्शाया जा रहा है, यह जांच का विषय है.
बार-बार की शिकायतों के बावजूद मरम्मत कार्य शुरू नहीं होने से ग्रामीणों में प्रशासन के प्रति भारी नाराजगी है. करोड़ों रुपए की सार्वजनिक संपत्ति की बर्बादी और प्यास से जूझते लोगों ने अब उच्च स्तरीय जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है.

वहीं इस मामले पर जब हमारे संवाददाता ने ठेकेदार संजय कुमार अग्रवाल से बात की तो उन्होंने कर्मचारी भेजकर टंकी और पाइप की मरम्मत करने की बात कही है. वहीं पीएचई विभाग की उप अभियंता रानू दिनकर ने कुछ तकनीकी समस्याओं के कारण हैंडओवर नहीं होने की बात कही है. उन्होंने इस विषय पर ज्यादा जानकारी देने से इंकार कर दिया.