‘प्रजा सुखे सुख मानहि राजा।प्रजा दुखे दुख मानहि राजा’ रामचरितमानस की इस चौपाई के अर्थ से स्पष्ट है कि सच्चा शासक वही है जो प्रजा के सुख में सुखी और दुःख में दुःखी हो। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव का राज्य के किसानों के साथ खड़ा होना, उनके ट्रैक्टर रैली में सहभागी बनना और किसान–केंद्रित नीतियों को लागू करने का भाव इस चौपाई के अनुरूप लगता हैं। हाल ही में भोपाल के जंबूरी मैदान से जिस अभियान का आग़ाज़ हुआ उसे एक सरकारी कार्यक्रम नहीं बल्कि मध्यप्रदेश की कृषि व्यवस्था को नई सोच, नई दिशा और नया आत्मविश्वास देने वाला ऐतिहासिक क्षण भी कहा जा सकता है। डॉ. मोहन यादव द्वारा “कृषक कल्याण वर्ष–2026” की औपचारिक शुरुआत उस संकल्प की घोषणा है जिसमें प्रदेश के किसानों को केवल उत्पादनकर्ता नहीं बल्कि तकनीक, बाजार और उद्यम से जुड़ा सशक्त भागीदार भी माना जा रहा है। भोपाल के जंबूरी मैदान से उठा यह संदेश पूरे प्रदेश में खेती-किसानी के भविष्य को परिभाषित कर रहा है।
इस कार्यक्रम की शुरुआत 1101 ट्रैक्टरों की भव्य रैली से हुई थी एक ऐसा दृश्य जिसने यह स्पष्ट कर दिया कि वर्ष 2026 , खेतों की आवाज़, किसानों की भागीदारी और सरकार की प्रतिबद्धता का प्रतीक बनने जा रहा है। स्वयं मुख्यमंत्री का ट्रैक्टर चलाकर रैली में शामिल होना, राजनीति और प्रशासन के बीच दूरी को कम करने वाला साबित हो रहा है। हेलिकॉप्टर से दिखती मध्यप्रदेश के उत्साही किसानों के ट्रैक्टरों की लंबी कतारें एक बड़े परिवर्तन की घोषणा है।
कृषक कल्याण वर्ष–2026 का मूल उद्देश्य खेती को परंपरागत दायरे से निकालकर लाभकारी, स्थायी और तकनीक आधारित रोजगार मॉडल के रूप में स्थापित करना है। उद्यानिकी, पशुपालन, डेयरी, मत्स्य-पालन और खाद्य प्रसंस्करण जैसे सेक्टर पर फ़ोकस करके राज्य की मोहन सरकार कृषि को अधिक लाभ देने वाला व्यवसाय बनाना चाहती है—बीज से ब्रांड तक की उनकी परिकल्पना अब आकर लेने लगी है।
एग्री-टेक, ड्रोन सेवाएं, एफपीओ प्रबंधन, हाइड्रोपोनिक्स और खाद्य प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों में निवेश और प्रशिक्षण के जरिए ग्रामीण युवाओं के लिए नए अवसर सृजित किए जाएँगे। इस शुरुआत से खेती को केवल आजीविका नहीं बल्कि नवाचार और स्टार्ट-अप संस्कृति से जोडा भी जाएगा। ‘खेत से फैक्ट्री तक’ का मुख्यमंत्री मोहन यादव का विज़न किसानों को बाजार की ताकत से जोड़ने वाला और गांवों में ही रोजगार के नए द्वार खोलने वाला साबित होगा है। निर्विवादित रूप से कहा जा सकता है कि मध्यप्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ कृषि है इस बात को ध्यान में रखकर ही प्रदेश की मोहन सरकार कृषि बजट में निरंतर वृद्धि, समर्थन मूल्य पर उपज की खरीदी, भावांतर योजना, फसल बीमा, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना, कृषि उन्नति योजना और रानी दुर्गावती श्रीअन्न प्रोत्साहन योजना जैसे कदम उठा रही हैं। सोयाबीन के बाद सरसों में भावांतर योजना का विस्तार और श्रीअन्न पर विशेष जोर का दिया जाना पोषण सुरक्षा और आय-वृद्धि दोनों को साधने के समग्र प्रयास हैं।

तीन बड़ी नदी परियोजनाओं से 25 जिलों की 16 लाख हेक्टेयर भूमि के सिंचित करने की योजना, खेती के जोखिम को घटाने का एक बड़ा कारक बनने वाली है। अगले तीन वर्षों में 30 लाख सोलर पम्प लगाने का विशाल लक्ष्य किसानों को ‘अन्नदाता’ से ‘ऊर्जादाता’ बनाने की दिशा में एक शानदार कदम होगा। माइक्रो इरिगेशन, ‘ड्रॉप मोर क्रॉप 2.0’, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन और आधुनिक तकनीक से फसल नुकसान का सर्वे से कृषि लागत घटेगा और किसानों की आय में बढ़ोतरी और स्थिरता आएगी।
इस अवसर पर प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अपने संबोधन में कहा था कि “भगवान किसान बलराम’ के जयकारे से शुरू होने वाला यह आयोजन भारतीय संस्कृति में किसान की केंद्रीय भूमिका को रेखांकित करने वाला है।” ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना रखने वाला और नदियों का मायका कहलाने वाला मध्यप्रदेश आज इस अभियान से आर्थिक और सांस्कृतिक शिखर में पहुँचने की तैयारी कर रहा है। यह अभियान गरीब, युवा, महिला और किसानों के समग्र कल्याण के लक्ष्य के साथ उनके समावेशी विकास के लिए प्रतिबद्ध है।
कृषक कल्याण वर्ष को सफल बनाने के लिए 16 से अधिक विभागों का सामूहिक प्रयास भी उल्लेखनीय रहा। बीज परीक्षण प्रयोगशालाओं का सुदृढ़ीकरण, मंडियों का आधुनिकीकरण, शून्य प्रतिशत ब्याज पर ऋण की निरंतरता और कृषि तंत्र में रिक्त पदों की भर्ती,ये सभी कदम इस अभियान को गति देने वाले साबित होंगे। ई-विकास, वितरण और कृषि उर्वरक आपूर्ति समाधान प्रणाली ऐप का शुभारंभ ये सभी डिजिटल सेवाओं के विस्तार का संकेत है।

टमाटर, लहसुन और प्याज उत्पादन में प्रदेश का अग्रणी और गेहूं के उत्पादन में देश में दूसरा स्थान रखने वाले मध्यप्रदेश की मजबूत उत्पादन क्षमता पर कोई संदेह नही है मगर सिर्फ़ चुनौती है सिर्फ़ ब्रांडिंग, निर्यात और मूल्य संवर्धन की। ‘एमपी ग्लोबल एग्री ब्रांडिंग’, मेगा फूड पार्क, फूड प्रोसेसिंग यूनिट और लॉजिस्टिक्स का विस्तार इस चुनौती से निपटने की ही तैयारियाँ हैं।
कृषक कल्याण वर्ष का कैलेंडर कोदो-कुटकी बोनस से लेकर आम महोत्सव, एफपीओ कन्वेंशन, फूड फेस्टिवल और गन्ना महोत्सव तक- यह सुनिश्चित करता है कि यह अभियान घोषणाओं तक सीमित न रहे, बल्कि सालभर जमीन पर दिखे। निरंतरता ही किसी नीति की विश्वसनीयता का आधार होती है।
कृषक कल्याण वर्ष–2026 मध्यप्रदेश की खेती के इतिहास में एक नया अध्याय लिख सकता है अगर निर्धारित योजनाओं का लाभ समय पर, पारदर्शी और व्यापक रूप से किसानों तक पहुंच सके। प्रति कृषक आय बढ़े, कृषि लागत में कमी आए, कृषि जोखिम घटे और प्रदेश के युवा खेती से जुड़ें तो यह वर्ष वास्तव में राज्य के लिए ‘वैभव की वापसी’ का वर्ष बन सकता है। जंबूरी मैदान से उठे इस संकल्प की सार्थकता तब ही है जब मध्यप्रदेश के खेतों में हरियाली, बाजारों में मजबूती और किसानों के चेहरे पर मुस्कान खिले क्योंकि किसानों की समृद्धि ही असली मायनो में मध्यप्रदेश की समृद्धि का आधार है।
संदीप अखिल
सलाहकार संपादक
न्यूज़ 24/लल्लूराम डॉट कॉम
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