अनुराग शर्मा, सीहोर। मध्य प्रदेश के सीहोर में आज आदिवासी समुदाय का आक्रोश फूट पड़ा। भेरुंदा (नसरुल्लागंज) के शासकीय अस्पताल में इलाज के दौरान हुई शिवानी बरेला की मौत के मामले में परिजनों और आदिवासी संगठनों ने कलेक्ट्रेट का घेराव किया। प्रदर्शनकारियों का स्पष्ट आरोप है कि शिवानी की मृत्यु स्वाभाविक नहीं, बल्कि डॉक्टर की घोर लापरवाही का परिणाम है।
क्या है पूरा मामला?
परिजनों के अनुसार, शिवानी को ऑपरेशन के लिए भेरुंदा अस्पताल में भर्ती कराया गया था। आरोप है कि ऑपरेशन के दौरान ड्यूटी डॉक्टर द्वारा बरती गई लापरवाही के कारण उसकी स्थिति बिगड़ गई और अंततः उसकी जान चली गई। इस घटना के बाद से ही पूरे आदिवासी समाज में शोक और गुस्से की लहर है। शिवानी के अंतिम संस्कार में उसके पेट से कैंची निकली है।
बर्खास्तगी से कम कुछ मंजूर नहीं
धरना प्रदर्शन के दौरान समाज के नेताओं ने प्रशासन को ज्ञापन सौंपते हुए सख्त चेतावनी दी है। उनकी मुख्य माँगें निम्नलिखित हैं: डॉ. रुक्मणी गुलहरिया को तत्काल प्रभाव से राजपत्रित सेवा से बर्खास्त किया जाए। दोषी डॉक्टर के खिलाफ गैर-जमानती धाराओं के तहत एफआईआर (FIR) दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया जाए। मृतक परिवार को उचित मुआवजा और पूर्ण न्याय सुनिश्चित हो।
आदिवासी समुदाय ने दो टूक शब्दों में कहा है कि यदि प्रशासन ने डॉक्टर को बचाने की कोशिश की या कार्रवाई में देरी हुई, तो उग्र आंदोलन किया जाएगा। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि स्वास्थ्य केंद्रों पर आदिवासियों के जीवन के साथ खिलवाड़ अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अब देखना यह है कि प्रशासन इस गंभीर शिकायत पर क्या कदम उठाता है और शिवानी के परिवार को न्याय कब तक मिलता है।
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