धनबाद के रणधीर वर्मा चौक स्थित गांधी सेवा समिति के समक्ष एक अनोखा और वैचारिक विवाह देखने को मिला जिसने शहर ही नहीं बल्कि समाज को भी सोचने पर मजबूर कर दिया. वामपंथी विचारधारा से प्रेरित कॉमरेड कपल गौरव विद्रोही और अजरानी निशानी ने पारंपरिक रीति-रिवाजों, आडंबर और फिजूलखर्ची को पूरी तरह नकारते हुए बेहद सादगी से विवाह संपन्न किया. इस विवाह में न तो पंडित थे न मंत्रोच्चार न ही कोई भव्य समारोह बल्कि संविधान की शपथ आपसी सम्मान और विचारधारा की मेल इस शादी की पहचान बना.

इस वैचारिक विवाह में दोनों वर-वधू ने एक-दूसरे को माला पहनाकर और लाल सलाम कहकर जीवन भर साथ निभाने का संकल्प लिया. यह विवाह दहेज प्रथा के खिलाफ एक मजबूत संदेश के रूप में सामने आया. दूल्हा और दुल्हन दोनों ने स्पष्ट किया कि उन्होंने बिना किसी लेन-देन और दहेज के यह शादी की है. क्योंकि वे दहेज जैसी सामाजिक कुरीति को समाज के लिए घातक मानते हैं.

नई नवेली दुल्हन अजरानी निशानी पेशे से लेखिका हैं और CPIML की जुझारू तेज-तर्रार और सक्रिय पार्टी नेत्री के रूप में जानी जाती हैं. वहीं दूल्हा गौरव विद्रोही भी CPIML के सक्रिय कार्यकर्ता हैं. उन्होंने यह भी बताया कि वे धनबाद के हीरापुर क्षेत्र की रहने वाली हैं और इस विवाह से उनके परिवार के लोग भी काफी खुश हैं.अजरानी ने कहा कि वे अपने जीवन के इस नए अध्याय को लेकर संतुष्ट और प्रसन्न हैं तथा शादी के बाद अब ससुराल के लिए रवाना होंगी.

गौरव विद्रोही ने बताया कि वे मूल रूप से उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के रहने वाले हैं. उनका और अजरानी का परिचय वर्ष 2015 में बिहार की राजधानी पटना में आयोजित एक पार्टी अधिवेशन के दौरान हुआ था.

दूल्हा-दुल्हन दोनों ने एक स्वर में कहा कि वे जीवन भर मजदूरों-किसानों के हक सामाजिक बराबरी और न्याय के लिए संघर्ष करते रहेंगे. उन्होंने कहा कि जब तक सांस चलेगी तब तक समाज के शोषित और वंचित वर्गों के हित में काम करते रहेंगे.

दुल्हन अजरानी निशानी ने कहा कि आज के दौर में जब देश गरीबी भुखमरी और बेरोजगारी जैसी गंभीर समस्याओं से जूझ रहा है, तब शादियों में लाखों रुपये खर्च करना उन्हें उचित नहीं लगा. उन्होंने कहा ढोल-बाजे आतिशबाजी सैकड़ों लोगों की बारात और नाच-गाने का ढोंग समाज को कोई सकारात्मक दिशा नहीं देता. हमने फिजूलखर्ची से दूर रहकर यह शादी इसलिए की ताकि समाज को एक नया संदेश दे सकें कि शादी आत्मविश्वास, प्रेम और बराबरी पर आधारित होती है.

शादी की सबसे खास बात यह रही कि इसमें किसी भी तरह का दिखावा नहीं किया गया. न कोई बड़ी बारात, न डीजे, न आतिशबाजी और न ही महंगे गहने या कपड़े. कपल ने साधारण शालीन और सादे परिधान पहनकर यह साबित किया कि विवाह प्रेम, विश्वास और विचारों का मिलन है, न कि धन-दौलत के प्रदर्शन का माध्यम. शादी पूरी तरह विचारधारा केंद्रित रही, जहां पूंजीवादी चमक-दमक की जगह सादगी और समानता को महत्व दिया गया.

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