दिलशाद अहमद, सूरजपुर। जिले की एक नाबालिग छात्रा के लापता होने के छह महीने बाद भी प्रशासन उसे वापस लाने में असफल नजर आ रहा है। बच्ची के पिता बीते छह महीनों से अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि तीन माह पूर्व छात्रा के बेंगलुरु में होने की जानकारी मिलने के बावजूद अब तक उसे घर नहीं लाया जा सका है। इसी को लेकर आज पूर्व विधायक पारसनाथ राजवाड़े और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर बच्ची को जल्द वापस लाने की मांग की है।


दरअसल, दूरस्थ क्षेत्र बिहारपुर की आठवीं कक्षा की छात्रा सूरजपुर में किराए के मकान में रहकर पढ़ाई करती थी। ऐसे में वह जुलाई 2025 से अचानक लापता हो गई, जहां अज्ञात लोगों द्वारा बहला-फुसलाकर भगाने की शिकायत भी दर्ज हुई। जिसकी पतासाजी में प्रशासन भी जुटा हुआ था। ऐसे में लापता बच्ची की जानकारी तीन माह पूर्व बेंगलुरु में होने के बाद उसे लेने एक टीम गई थी, लेकिन दस्तावेजों के अभाव में बेंगलुरु की प्रशासनिक टीम से बच्ची को वापस नहीं लाया जा सका।

इस मामले में पूर्व विधायक पारसनाथ राजवाड़े ने प्रशासन के साथ स्थानीय विधायक और मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े पर लापरवाही का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि जानकारी होने के बाद भी बच्ची को अब तक नहीं लाना समझ से परे है।
क्या कहते हैं अधिकारी
वहीं महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी शुभम बंसल ने बताया कि एक बच्ची किसी कारणवश ट्रेन के माध्यम से यशवंतपुर (बेंगलुरु) पहुंच गई थी। उसे वापस लाने के लिए विभाग लगातार प्रयासरत है। कलेक्टर द्वारा इस संबंध में वहां के कलेक्टर को अर्द्धशासकीय पत्र तथा महिला एवं बाल विकास विभाग के सचिव को भी पत्र प्रेषित किया गया है। संचालनालय महिला एवं बाल विकास और कलेक्टर इस दिशा में लगातार प्रयास कर रहे हैं और संभवतः जल्द ही बच्ची हमारे बीच वापस आ जाएगी।

विभाग पर लग रहे आरोपों पर अधिकारी का कहना है कि इसमें वास्तव में कुछ तकनीकी त्रुटि थी। पूर्व में एक टीम बच्ची को लेने के लिए गई थी, लेकिन कुछ तकनीकी त्रुटियों की वजह से बच्ची वापस नहीं आ सकी थी। अब पुनः बेंगलुरु की टीम के साथ समन्वय कर बच्ची को वापस लाने की प्रक्रिया की जा रही है और संभवतः जल्द ही बच्ची हमारे बीच आ जाएगी। उन्होंने कहा कि तकनीकी हमारी तरफ से नहीं थी, बल्कि बेंगलुरु की तरफ से था।
उन्होंने बताया कि भारत सरकार के ‘घर पोर्टल’ में बच्ची की एंट्री की जानी थी, जिसके बाद उसकी सामाजिक अन्वेषण रिपोर्ट हमारे द्वारा सबमिट की जानी थी। लेकिन वहां बच्ची की पोर्टल में एंट्री नहीं की गई थी, जिसके कारण अन्वेषण रिपोर्ट तैयार नहीं हो सकी और प्रक्रिया में विलंब हुआ।
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