हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू को गणतंत्र दिवस पर शिमला में झंडा फहराने पर मानव बम से हमले की धमकी मिली है। यह धमकी जिला उपायुक्त शिमला को ईमेल के जरिए भेजी गई। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है, हालांकि इसे अफवाह बताया जा रहा है। गणतंत्र दिवस के लिए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की गई है। धमकी को गंभीरता से लेते हुए थाना सदर शिमला में अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है. इस केस में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 351(3), 353(1)(b) और 152 के तहत कार्रवाई की गई है. ई-मेल पुलिस अधिकारियों के माध्यम से थाने तक पहुंचाई गई और तुरंत कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई.

हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू को गणतंत्र दिवस के अवसर पर आत्मघाती हमले की धमकी मिली है. यह धमकी डीसी ऑफिस शिमला की आधिकारिक ई-मेल ID पर भेजी गई, जिसमें लिखा गया कि यदि मुख्यमंत्री झंडा फहराने रिज मैदान पहुंचते हैं, तो उन पर मानव बम से हमला किया जाएगा.

इस बार राज्य स्तरीय गणतंत्र दिवस समारोह शिमला के रिज मैदान में आयोजित होगा, जहां मुख्यमंत्री तिरंगा फहराएंगे. धमकी के बाद सुरक्षा व्यवस्था और सख्त कर दी गई है. रिज मैदान शिमला का केंद्रीय और सबसे महत्वपूर्ण स्थल है, जहां हर साल गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस के समारोह आयोजित किए जाते हैं.

यह ई-मेल एक गुमनाम ID से भेजी गई है. साइबर सेल और तकनीकी विशेषज्ञ मेल के स्रोत, IP एड्रेस और लोकेशन का पता लगाने में जुटे हैं, ताकि आरोपी को जल्द गिरफ्तार किया जा सके. साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि आधुनिक तकनीक की मदद से ई-मेल भेजने वाले की पहचान करना संभव है, भले ही उसने VPN या अन्य तरीकों का इस्तेमाल किया हो.

पुलिस अधिकारियों ने आम जनता से अपील की है कि वे इस तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें और किसी भी संदिग्ध सूचना या गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस को दें। साथ ही, कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए गणतंत्र दिवस के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को और कड़ा कर दिया गया है। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

BNS की धाराओं के तहत दर्ज इस मामले में आरोपी को कड़ी सजा हो सकती है. झूठी धमकी देना, सरकारी कामकाज में बाधा डालना और लोक शांति भंग करने के लिए कानून में सख्त प्रावधान हैं. विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे मामलों में कई साल की सजा और भारी जुर्माना हो सकता है.

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